
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) से संबद्ध बीएड महाविद्यालयों में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर गठित सात सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अनियमितता के इस मामले में समिति ने चार कालेजों को वहां जाकर देखा। इसमें से दो कालेज एक ही पते पर संचालित थे। वहीं एक कालेज कागजों के अलावा कहीं नहीं मिला।
जांच में सामने आया कि कुछ महाविद्यालय अपने घोषित पते पर संचालित ही नहीं हो रहे थे, जबकि कई संस्थानों में शिक्षक शिक्षा के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
जांच समिति शुक्रवार को भोपाल में चार महाविद्यालयों के निरीक्षण के लिए पहुंची। प्रारंभिक जांच में पता चला कि जिन परिसरों में तीन कालेज संचालित होने की जानकारी थी, वहां एक अतिरिक्त बीएड कालेज भी संचालित पाया गया। इस तरह समिति ने कुल चार संस्थानों का भौतिक सत्यापन किया।
वहीं शनिवार को समिति जब सेवियर महाविद्यालय के निरीक्षण के लिए पहुंची तो संबंधित संस्थान दिए गए पते पर नहीं मिला। निरीक्षण के बाद समिति ने बीयू के कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा से भी मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नईदुनिया में फर्जी बीएड महाविद्यालयों की खबर प्रकाशित होने के बाद यह जांच शुरू कराई थी। समिति को जियो-टैगिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के माध्यम से संस्थानों का भौतिक सत्यापन कर पांच कार्य दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व दिया गया था।
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समिति में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एचसीएस राठौर, यूजीसी की सदस्य आशिमा मंगला, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी भगवती प्रसाद कलाल एवं जेपी सिंह और एनसीटीई के विजय राणा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। अब 360 डिग्री व्यापक जांच पूरी होने के बाद दोषी संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।