
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से निर्वाचन सदन तक पैदल मार्च किया। कांग्रेस ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर देश भर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने का गंभीर आरोप लगाते हुए लोकतंत्र को खतरे में बताया है।
प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं है। भाजपा सरकार ने निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की जगह अपनी सरकार के मंत्री को मेंबर बनाया, तभी निर्वाचन आयोग को कमजोर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। यह देश, मध्य प्रदेश और संविधान को बचाने की लड़ाई है। यह केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ने भी अपनी भूमिका संविधान को बचाने के लिए नहीं निभाई। आरएसएस, पूंजीपति और नरेंद्र मोदी का गठजोड़ बना हुआ है, जो देश को संविधान वोट कानून से नहीं अपनी ताकत के बल पर चलना चाहते हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी का वोट चोरी की आवाज उठाई, तो भारतीय जनता पार्टी के सभी मुख्यमंत्री मैदान में उतर आए। आखिर इतना डर किस बात का है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए बेरिकेट लगा सकते हो, लेकिन देश की जनता के लिए लड़ने से नहीं रोक सकते हो।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरोध में आयोजित कांग्रेस के इस प्रदर्शन में अभी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पहुंचे। विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय (निर्वाचन सदन) तक गए।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर देश के लगभग 13 करोड़ मतदाता भाइयों के नाम काट दिए गए हैं। यही पार्टी की मुख्य शिकायत है। नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि आज पूरे देश में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोकतंत्र खतरे में है।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने निशाना साधते हुए कहा कि जब से ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग का पद संभाला है, तब से हालात खराब हैं। उन्होंने बताया कि संधू जी और जोशी जी ने भी इस बात पर आपत्ति जताई थी कि चुनाव आयोग द्वारा जिस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई, वह ठीक नहीं थी। दिग्विजय सिंह ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी सफल लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होना बेहद आवश्यक है।