
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में गोकशी और स्लॉटर हाउस अनुमति विवाद ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। मामले को एक महीने से ज्यादा बीत चुका है। बावजूद यह शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस पार्षद दल ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जैकी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने संभाग आयुक्त संजीव सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए मालती राय और एमआइसी सदस्य आरके सिंह बघेल के इस्तीफे की मांग दोहराई।
कांग्रेस का आरोप है कि गोकशी प्रकरण में केवल निचले स्तर के दैनिक वेतनभोगी और नियमित कर्मचारियों पर एकतरफा कार्रवाई की गई, जबकि नीति और निर्णय स्तर पर जिम्मेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है। यह न केवल चयनात्मक कार्रवाई है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन भी है।
कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही शहर के प्रथम नागरिक और मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) की बनती है। हकीकत यह है कि जो सब कुछ हुआ, वह मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के सदस्यों की जानकारी और सहमति से हुआ, लेकिन जवाबदेही तय करने के बजाए अब 8-9 हजार रुपये की नौकरी करने वाले विनियमित कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है। इस दौरान पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, प्रवीण सक्सेना, जीत सिंह राजपूत, लक्ष्मण राजपूत, जहीर खान आदि मौजूद रहे।
ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह बुधवार को तो हिंदूवादी संगठनों ने महापौर मालती राय के बंगले का घेराव कर दिया था। वहीं मुल्ला कहकर संबोधित किया था। दूसरी ओर, गुरुवार को हिंदू उत्सव समिति ने स्लॉटर हाउस पहुंचकर पड़ताल की थी। देर रात स्लाटर हाउस में अवैध गतिविधियां होने या सबूत छिपाए जाने की खबरों के बाद समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी समेत कई पदाधिकारी-कार्यकर्ता पहुंचे थे। हालांकि पुलिस ने किसी को अंदर नहीं जाने दिया।
नगर निगम क्षेत्र में संचालित स्लाटर हाउस को 20 सालों की अनुमति से जुड़ा है। कांग्रेस पार्षद दल का दावा है कि यह अनुमति एमआईसी के माध्यम से दी गई, जबकि नगर निगम अधिनियम के अनुसार ऐसे मामलों में परिषद से प्रस्ताव पारित कराना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे निर्णय को असंवैधानिक करार दिया जा रहा है। इस संबंध में कांग्रेस ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि एमआइसी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया है। पत्र में कहा गया है कि यदि निर्णय सामूहिक था तो कार्रवाई भी सामूहिक होनी चाहिए, न कि केवल कर्मचारियों तक सीमित। यह प्राकृतिक न्याय और प्रशासनिक कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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स्लाटर हाउस को 20 वर्ष की अनुमति की वैधानिक जांच।
निर्णय में शामिल एमआइसी सदस्यों की भूमिका तय कर कार्रवाई कर्मचारियों पर की गई एकतरफा कार्रवाई।
तत्काल स्थगित नियम विरुद्ध पाए जाने पर जिम्मेदार एमआइसी सदस्यों व अधिकारियों पर दंडात्मक कदम।