
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। हाई-प्रोफाइल त्विषा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी विधिक और कूट कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई ने इस संवेदनशील केस को पूरी तरह से भोपाल पुलिस से अपने हाथ में ले लिया है। इस कदम के तहत केंद्रीय एजेंसी ने भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज मूल एफआईआर (FIR) को दोबारा अपने नाम से (री-रजिस्टर्ड) पंजीकृत कर लिया है। मामले की कमान संभालते ही सीबीआई की एक विशेष टीम भोपाल पहुंच चुकी है और आधिकारिक रूप से इस पूरे मामले की जांच शुरू करने जा रही है।
#UPDATE | The CBI has registered a case in this matter under Sections 80(2), 85, and 3(5) of the BNS, as well as Sections 3 and 4 of the Dowry Prohibition Act. According to the FIR, the deceased was married to Samarth Singh on December 9, 2025. Since the marriage, allegations… https://t.co/9Rm3l9jHbQ
— ANI (@ANI) May 25, 2026
सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त विधिक रुख अपनाया है। केंद्रीय एजेंसी द्वारा दर्ज की गई नई एफआईआर में देश के नए आपराधिक कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज विरोधी अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं को शामिल किया गया है:
#WATCH | Twisha Sharma death case | Bhopal | Twisha's husband and the accused Samarth Singh being taken away by the police, from his residence https://t.co/FQFmDILich pic.twitter.com/xMvsb3fiu7
— ANI (@ANI) May 25, 2026
मामले में दर्ज एफआईआर (FIR) के साक्ष्यों के अनुसार, मृतका त्विषा शर्मा का विवाह 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ संपन्न हुआ था। परिजनों का आरोप है कि विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग खुश नहीं थे। शिकायत में विधिक रूप से दर्ज कराया गया है कि शादी के तुरंत बाद से ही ससुराल वालों द्वारा त्विषा को अतिरिक्त दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उसे न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, बल्कि गंभीर शारीरिक यातनाएं भी दी जा रही थीं।
सांख्यिकीय और विधिक विवरणों के अनुसार, त्विषा शर्मा की मौत की दर्दनाक जानकारी 12 मई 2026 की रात को करीब 10:20 बजे प्रशासनिक रूप से प्राप्त हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस और डॉक्टरों की टीम ने जो मेडिकल जांच की, उसमें शुरुआती तौर पर महिला की मौत फांसी लगाने के कारण होना सामने आया।
इसके बाद आई विस्तृत पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है। पीएम रिपोर्ट में विधिक रूप से "एंटीमॉर्टम हैंगिंग" (Antemortem Hanging) की पुष्टि हुई है, जिसका सीधा वैज्ञानिक मतलब यह है कि फांसी की घटना तब हुई जब पीड़िता जीवित थी। इसके अलावा डॉक्टरों को मृतका के शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट के निशान (Injury Marks) भी मिले हैं। फॉरेंसिक जांच में माना गया है कि ये चोटें किसी भारी चीज के प्रहार से या बेरहमी से की गई मारपीट के कारण लगी थीं। मृतका के परिवार ने एफआईआर में साफ कहा है कि यह सब अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने के कारण किया गया।
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इस मामले की संवेदनशीलता और कूट महत्व को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही अपनी विधिक सहमति दे दी थी। राज्य सरकार ने 'दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम' (DSPE Act) की धारा 6 के तहत इस केस की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी।