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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर के इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य गैस राहत अस्पताल की डॉ. पूजा तिवारी ने गर्भवती महिला और उसके पति को यह कहकर लौटा दिया कि अस्पताल में सर्जिकल उपकरण की कमी है। साथ ही कहा कि हमीदिया अस्पताल लेकर चले जाएं, ऐसे में महिला की हालत बिगड़ने लगी तो पति निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उसके 80 हजार रुपये खर्च हो गए। यह शिकायत कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को चांदबड़ 80 फिट रोड निवासी प्रशांत कुशवाहा ने की है। साथ ही मांग की है कि डॉ. पूजा तिवारी का वेतन काटकर उन्हें खर्च हुई राशि दिलाई जाए। इसके अलावा 117 आवेदकों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों को बताई, जिन्हें जल्द से जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया गया है।
प्रशांत कुशवाह ने कलेक्टर को शिकायत करते हुए बताया कि वह पिछले साल फरवरी में पत्नी पूजा कुशवाहा को प्रसव के लिए इंदिरा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन मौके पर मौजूद डॉ. पूजा तिवारी ने बिना जांच किए ही जच्चा बच्चा को जान का खतरा बता दिया साथ ही हमीदिया अस्पताल भेज दिया। अस्पताल में सिजेरियन व सर्जिकल उपकरणों की कमी बता दी, ऐसे में पत्नी की नाजुक स्थिति को देखकर वे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां सिजेरियन डिलीवरी पर 80 हजार रुपये खर्च हो गए। उनके पास रुपये नहीं थे, इससे उधारी कर अस्पताल का बिल चुकाया है। साथ ही शासन की तमाम योजनाओं के बाद भी उनका लाभ नहीं ले पाया और कर्जा हो गया, जिसकी जिम्मेदार डॉ. पूजा तिवारी हैं। इस कारण उनके वेतन से 80 हजार रुपए की राशि काटकर उन्हें दी जाए, ताकि वे सिजेरियन पर खर्च हुई राशि चुकाकर कर्ज मुक्त हो सकें। इस मामले की जांच सीएमएचओ (गैस राहत) को सौंपी गई है।
पश्चिमी बायपास के निर्माण पर आपत्ति भोपाल में बनाए जा रहे चार लेन पश्चिमी भोपाल बायपास को लेकर ग्राम पंचायत भानपुर केकड़िया के एक आदिवासी परिवार ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए बताया है कि जिस जगह से होकर बायपास निकल रहा है, वहां की 0.675 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर एक आदिवासी परिवार कई दशकों से खेती करते हुए जीवन यापन करता आ रहा है। ऐसे में यदि यह जमीन बायपास निर्माण के उपयोग में आ जाती है, तो इस परिवार पर जीवन यापन का संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में या तो बायपास का मार्ग बदला जाए या फिर परिवार को दूसरी जगह पर खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि परिवार खेती कर जीवन यापन कर सके।
दारोगा ने महिलाकर्मी से वसूले छह हजार जहांगीराबाद निवासी अनिता गोहर ने शिकायत की है कि वह वार्ड 42 में 25 दिवसीय सफाईकर्मी है। नौकरी पर बने रहने के लिए उन्हें हर माह वेतन से छह हजार रुपए दारोगा को देने होते थे। जबसे उन्होंने छह हजार रुपये देना बंद किए हैं, तब से दारोगा ने उनकी पगार आईडी बंद कर दी है और नौकरी से भगाने की धमकी देता है। मामले की जांच अपर आयुक्त, नगर निगम को सौंपी है।
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