
धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया, भोपाल। राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश कांग्रेस के पास विधायकों की पर्याप्त संख्या होने के बाद भी नामांकन पत्र भरने में हुई लापरवाही के कारण एक सीट हाथ से निकल गई। पहले से ही संभावना थी कि तीसरी सीट पर भाजपा आवश्यक वोट यानी विधायक न होने के बाद भी अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी और हुआ भी वही। कांग्रेस के ही बड़े नेता बता रहे हैं कि भाजपा की तीसरी सीट पर लड़ने की योजना को देखते हुए ही कांग्रेस में दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को प्रत्याशी बनाए जाने पर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे थे।
उन्हें तैयार रहने का संकेत भी कर दिया गया था। कमल नाथ ने भी नामांकन भरने के लिए जरूरी दस्तावेज भी एकत्र करवा लिए थे। उन्होंने दो जून को सरकारी आवास के वर्ष 2023 से वर्ष 2027 तक के जल कर (वाटर टैक्स) की बकाया राशि एक लाख 41 हजार 220 रुपये और चार जून को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन यानी कचरा एकत्रीकरण टैक्स की राशि 4,236 रुपये नगर निगम भोपाल में जमा कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर लिया था। हालांकि ऐन वक्त पर हाईकमान ने मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
हालांकि उनका नामांकन रद हो गया। राजनीति में जो दिखाई देता है, हमेशा वैसा होता नहीं। ऐसा ही कुछ राज्यसभा चुनाव में दिखाई दिया। चुनाव की हलचल में कांग्रेस का एक केंद्र वरिष्ठ नेता कमल नाथ थे। विधानसभा चुनाव 2023 में मिली हार के बाद से कमल नाथ मध्य प्रदेश की राजनीति में कम सक्रिय हैं, लेकिन पर्दे के पीछे से मोर्चा संभालते हुए वह राज्यसभा जाने की तैयारी में थे। वह इतने आश्वस्त थे कि नामांकन पत्र में जमा किए जाने वाले टैक्स आदि की रसीदें व एनओसी भी प्राप्त कर लिया था।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा कि जिस नेता ने दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति में दखल रखा उनका ऐन चुनाव के वक्त एनओसी लेना इसी बात का संकेत है कि वह नामांकन भरने को लेकर गंभीर थे। कोई चूक नहीं चाहते थे। दरअसल, कमल नाथ का मिजाज भी हमेशा से दिल्ली की राजनीति का रहा है। वह सोनिया गांधी के समय से पार्टी के संकटमोचक रहे हैं और राज्यसभा के जरिये वह केंद्रीय नेतृत्व के करीब बने रहना चाहते थे। कमल नाथ ने चुनाव लड़ने की योजना को भी अंतिम रूप दे दिया था।
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नजदीकी सूत्र बताते हैं कि नामांकन के बाद वह सभी कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु ले जाना चाहते थे। वहां भी व्यवस्था चाक-चौबंद थी लेकिन मौका नहीं मिला। कांग्रेस के ही सूत्र कहते हैं कि मीनाक्षी की उम्मीदवारी प्रदेश संगठन से लेकर विधायक तक कोई पसंद नहीं कर रहा था। इसलिए उनके नामांकन पत्र में बारीकियों का ध्यान नहीं रखा गया।
कमन नाथ ने नगर निगम की बकाया राशि जमा की थी, इसे देखकर तो लगता है कि वह राज्यसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे पर कांग्रेस ने उन्हें धोखा दिया। - किशन सूर्यवंशी, अध्यक्ष, नगर निगम परिषद, भोपाल।