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DA in MP: एमपी सरकार ने कर्मचारियों का 7 माह का महंगाई भत्‍ता रोका, पेंशनर्स का डीआर भी अटका

DA Hike in MP: वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) व राहत (डीआर) में वृद्धि सात माह से रोककर रखी गई है।

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 30 Jul 2026 08:33:14 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Jul 2026 10:46:37 PM (IST)
DA in MP: एमपी सरकार ने कर्मचारियों का 7 माह का महंगाई भत्‍ता रोका, पेंशनर्स का डीआर भी अटका
कर्मचारी अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। - एआई फोटो।

HighLights

  1. राजस्व घाटे में आने से बचने को खर्च नियंत्रित कर रही है प्रदेश सरकार।
  2. वर्ष 2026-27 में 44.42 करोड़ रुपये राजस्व अधिक रहने का अनुमान।
  3. 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आय प्रभावित, खर्च भी बढ़ गया है।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने 44.42 करोड़ रुपये राजस्व अधिक रहने का अनुमान जताया है। जब बजट प्रस्तुत किया गया था, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां सामान्य थीं लेकिन आज जो हालात बने हैं, वे अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहे हैं। कमजोर मानसून ने भी चुनौती बढ़ा दी है।

वित्त विभाग का अनुमान है कि 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित हो सकता है। इससे राजस्व अधिक के स्थान पर घाटे की स्थिति आ सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने खर्च नियंत्रित करने के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।


वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) व राहत (डीआर) में वृद्धि सात माह से रोककर रखी गई है। उधर, महंगाई बढ़ती जा रही है, जिससे कर्मचारी भी परेशान हैं और सरकार को चेतावनी दे दी है कि 10 अगस्त तक यदि महंगाई राहत में वृद्धि का निर्णय नहीं किया गया तो 18 अगस्त से आंदोलन प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रदेश के कर्मचारियों को वर्तमान में 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 4,38,317 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। आय की तुलना में व्यय कम रहने के कारण 44.42 करोड़ रुपये आय-व्यय के अनुपात में अधिक रहने की संभावना है।

हालांकि, इस बार प्रदेश को झटके बड़े भी लगे हैं। पहले तो राज्य को सालाना करीब 7,500 करोड़ रुपये का घाटा छठवें वित्त आयोग की अनुशंसा के कारण उठाना पड़ा। यह आगामी पांच साल तक बढ़ता जाएगा।

वहीं, जीएसटी में तीन से चार प्रतिशत की कमी है। कुल मिलाकर लगभग दस हजार करोड़ रुपये की आय सरकार की प्रभावित हो रही है। एक प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ाने पर लगभग 570 करोड़ रुपये का वार्षिक भार आता है। जनवरी 2026 से यदि महंगाई भत्ता व राहत 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाता है तो लगभग 1,100 करोड़ रुपये लगेंगे।

स्वामित्व योजना में निश्शुल्क रजिस्ट्री कराने के कारण 3,800 करोड़ रुपये अतिरिक्त भार आ गया है। अब जो अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी जाएगी, उसके लिए राशि की व्यवस्था राजकोष से करनी पड़ेगी। यही कारण है कि वित्त विभाग ने मितव्ययिता अपनाने के दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।

इसमें नए वाहनों की खरीदी, विदेश यात्रा, वाहनों के उपयोग की युक्तियुक्त व्यवस्था, बड़े कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, तय किया गया है कि यदि सितंबर में कर संग्रहण बढ़ता है तो फिर महंगाई भत्ता बढाने पर विचार किया जाएगा।

तेल, बिजली, सब्जी से लेकर सब महंगा

  • उधर, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है।
  • मार्च से जून 2026 के बीच घरेलू गैस लगभग 89 रुपये और पेट्रोल में नौ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।
  • इसका असर यह हुआ कि हर चीज महंगी हो गई। भारत सरकार ने तो अपने कर्मचारियों की चिंता करते हुए महंगाई भत्ता व राहत 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया मगर प्रदेश सरकार ने अब तक निर्णय नहीं लिया।
  • प्रदेश के अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को तो एक जनवरी 2026 से इस लाभ देने के आदेश जारी कर दिए लेकिन राज्य के कर्मचारियों को छोड़ दिया।
  • 10 अगस्त तक यदि इस संबंध में सरकार निर्णय नहीं करती है तो 18 अगस्त को राज्य स्तरीय प्रदर्शन होगा।

आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगा 26 हजार वेतन, 11 माह एरियर

यूपी-हरियाणा जैसी नीति और नियमित भर्ती में 50% आरक्षण की मांगनवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को ज्ञापन सौंपकर यूपी-हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति और न्यूनतम 26 हजार रुपये वेतन की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह का कहना है कि अस्पतालों में आउटसोर्स कर्मी पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन एजेंसियों की मनमानी से समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कटनी में 6500 रुपये वेतन दिया जा रहा है।

कई जिलों में चार-पांच महीने से भुगतान अटका है। संघ की छह प्रमुख मांगें हैं। 11 माह का एरियर जारी हो, तीन साल बाद वार्षिक इन्क्रीमेंट, अवकाश व स्वास्थ्य बीमा, नियमित भर्ती में 50% आरक्षण और अकारण सेवामुक्ति पर रोक।

संघ ने इंटक के अशोक गोस्वामी पर कर्मचारियों को भड़काने का आरोप लगाकर जांच की मांग की। चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो प्रदेशभर में आंदोलन होगा।