
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। दिल्ली के मालवीय नगर के हौजरानी में स्थित फ्लारिस स्टे होटल में हुए अग्निकांड को लेकर प्रदेश सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। दिल्ली अग्निकांड के बाद प्रदेश के सभी मॉल, कॉलेज, होटल, रेस्टोरेंट में अग्नि सुरक्षा के उपायों की जांच की जाएगी। सभी भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगा है या नहीं इसका परीक्षण किया जाएगा।
इसके अलावा ऐसे भवन जिन्हें एबी पास (ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम) से भवन अनुज्ञा जारी हुए तीन वर्ष या उससे अधिक समय हो गया है तो उनकी फायर एनओसी (अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण-पत्र) व सर्टिफिकेट का परीक्षण किया जाएगा। जिन प्रकरणों में आवश्यक अग्नि सुरक्षा अनुमतियां, फायर एनओसी अथवा अन्य वैधानिक प्रविधानों का अनुपालन नहीं पाया जाता है, उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसका संक्षिप्त प्रतिवेदन, प्रकरणवार विवरण सहित संचालनालय को भेजना होगा। ऐसे भवन जिनका फायर ऑडिट नहीं हुआ है उनको नोटिस देकर फायर ऑडिट कराया जाएगा।
इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने समस्त नगर निगम आयुक्तों, सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को निर्देश जारी किया है। निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के अंतर्गत आने वाले भवनों के लिए अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रविधानों का पालन किया जाना अनिवार्य है।
परीक्षण के दौरान पात्र प्रकरणों में यह सत्यापित करना होगा कि भवन स्वामी/विकासकर्ता द्वारा निर्धारित फायर सेफ्टी प्लान स्वीकृत कराया गया है या नहीं। आवश्यक फायर एनओसी, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त किया गया है या नहीं। अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रविधानों का स्थल पर अनुपालन सुनिश्चित किया गया है या नहीं। बता दें, 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भवनों, एक तल पर 500 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले भवनों तथा अन्य पात्र श्रेणी के भवनों में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रविधानों का पालन अनिवार्य है।
वर्ष 2022 में फायर एनओसी देने के नए नियम बनाए गए थे। जिसमें अस्थायी या प्रोविजनल एनओसी देने पर रोक लगा दी गई और नियम अनुसार आवेदन करने पर ही एनओसी देने की व्यवस्था की गई है। अस्पताल खोलने या पुराने के नवीनीकरण के लिए 12 दस्तावेज मांगे जाते हैं। इनमें फायर एनओसी सख्ती से अनिवार्य की गई है। ई-नगर पालिका पोर्टल पर एनओसी देने की व्यवस्था की गई है।
लेकिन प्रदेश में भी सरकारी भवनों व अस्पतालों में आग से शासकीय संपत्ति व जनहानि हो चुकी है। सतपुड़ा भवन और फिर मंत्रालय में भीषण आग से सरकारी दस्तावेज सहित शासकीय संपत्ति की हानि हुई थी। प्रदेश के अस्पतालों में भी आग की घटना से कई बच्चों को अपनी जान गंवाना पड़ी थी। प्रदेश के छह बड़े अस्पतालों में आग लगने से बच्चे, वृद्ध सहित 25 से अधिक मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं।
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