MP में मनरेगा का महाघोटाला: सरकारी एप का 'क्लोन' बनाकर दर्ज की फर्जी हाजिरी; ₹200 करोड़ के गबन की आशंका, CBI जांच की मांग
मध्य प्रदेश में कई जिलों में मनरेगा (एनएमएमएस) एप का क्लोन तैयार कर फर्जी उपस्थिति लगाकर करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। कई जिलों में ऐसे ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 08:55:37 AM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 08:56:30 AM (IST)
मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा होने की शिकायत के साथ सीबीआई जांच की मांग की गई है। फोटो एआई से तैयार की गई है।HighLights
- NMMS एप के क्लोन से मनरेगा मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान का आरोप
- मुरैना में फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज, प्रदेश के अन्य जिलों में भी जांच शुरू
- करीब 200 करोड़ रुपये के संभावित गबन की आशंका, सीबीआई जांच की मांग
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में मनरेगा के तहत मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने वाले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप के क्लोन या टेंपर्ड वर्जन का इस्तेमाल कर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने और करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है।
मुरैना सहित कई जिलों में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। मामले को गंभीर मानते हुए प्रदेशभर में इसकी जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
पूर्व विधायक किशोर समरीते ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को शिकायत भेजकर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
बता दें, मनरेगा योजना 30 जून को बंद हो रही है। इसकी जगह एक जुलाई से वीबी-जी राम जी योजना लागू हो जाएगी।
क्या है आरोप?
शिकायत के अनुसार कुछ लोगों ने एनएमएमएस एप का क्लोन या टेंपर्ड वर्जन तैयार कर लिया, जिसके माध्यम से बिना वास्तविक कार्यस्थल पर पहुंचे, बिना जियो-टैगिंग और बिना सत्यापन के जॉब कार्डधारकों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई। इसके आधार पर भुगतान भी जारी हो गया।
आरोप है कि डिजिटल सिस्टम में सेंधमारी कर पिछले दो वर्षों से कई जिलों में इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। शिकायतकर्ता का दावा है कि पिछले एक वर्ष में ही करीब 200 करोड़ रुपये तक की राशि फर्जी उपस्थिति के जरिए निकाली गई हो सकती है।
मुरैना में दर्ज हुई एफआईआर
मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने जांच के बाद एक जून को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खड़कपुर ग्राम पंचायत में रोजगार सहायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
डिजिटल सुरक्षा पर उठे सवाल
मामले ने सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सरकारी एप का क्लोन बनाकर भुगतान प्रक्रिया प्रभावित की जा सकती है, तो यह साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
सरकार ने क्या कहा?
मुरैना में यह प्रकरण सामने आया था। वहां के कलेक्टर ने जांच कर एफआइआर भी दर्ज करा दी है। यह भारत सरकार का पोर्टल है उनके संज्ञान में मामला लाया गया है। एप के क्लोन को बंद करने सहित अन्य कार्रवाई भारत सरकार द्वारा की गई है। ऐसा तो देश के अन्य राज्यों में कहीं भी हो सकता है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी दिखवा रहे हैं कि कहीं किसी क्लोन एप से तो फर्जी भुगतान नहीं किया जा रहा है।- दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग