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दिग्विजय सिंह ने उज्जैन जमीन मामले में मोहन सरकार के निर्णय को दी 'क्लीनचिट', कहा- ट्रस्ट को संपत्ति देने में कोई घोटाला नहीं

दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी के आरोप को गलत ठहराते हुए सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए 1 रुपये की टोकन राशि...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 08:48:28 PM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 09:06:00 PM (IST)
दिग्विजय सिंह ने उज्जैन जमीन मामले में मोहन सरकार के निर्णय को दी 'क्लीनचिट', कहा- ट्रस्ट को संपत्ति देने में कोई घोटाला नहीं
दिग्विजय सिंह ने किया मोहन यादव का बचाव। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उज्जैन जमीन मामले में दिग्विजय सिंह की मोहन सरकार को क्लीनचिट
  2. जीतू पटवारी के महाघोटाले के दावे की दिग्विजय सिंह ने निकाली हवा
  3. वीर भारत न्यास विवाद में दिग्विजय सिंह ने किया मोहन यादव का बचाव

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर बड़ा अंतर्विरोध खुलकर सामने आया है। उज्जैन में वीर भारत न्यास को जमीन और बिल्डिंग देने के मामले में घोटाले के कथित आरोप पर शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मोहन सरकार को 'क्लीनचिट' दे दी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति को मात्र एक रुपये की लीज पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी के वीर भारत न्यास को सौंपने के आरोप की हवा खुद दिग्विजय सिंह ने निकाल दी है।


सरकार के इस निर्णय का बचाव किया

उज्जैन में मीडिया से चर्चा में दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार के इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि वह बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते और सांस्कृतिक संस्था वीर भारत न्यास को जमीन नियमानुसार ही आवंटित की गई है। इस बयान के बाद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने चली कांग्रेस खुद बैकफुट पर आ गई है।

'टोकन राशि पर जमीन देना तय प्रक्रिया'

दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी के आरोप को गलत ठहराते हुए सरकार की नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना हमेशा से एक तय और सही प्रक्रिया रही है। वीर भारत न्यास निजी नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है। दिग्विजय सिंह ने दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे हैं। उस समय यह चर्चा चली कि इस संपत्ति को ओबेरॉय होटल को दे दिया जाए।

जीतू पटवारी का आरोप और दिग्विजय सिंह की क्लीन चिट श्री राम तिवारी को @jitupatwari @digvijaya_28

pic.twitter.com/D6kGbrnmoB

— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) June 27, 2026

इसे दिग्विजय सिंह का अपनी ही पार्टी के खिलाफ रुख न भी माना जाए तो भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भ्रष्टाचार के आरोप को सिरे से खारिज जरूर कर दिया है। बता दें, जीतू पटवारी ने गुरुवार को दिल्ली में पत्रकार वार्ता कर डॉ. मोहन यादव पर घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन और बिल्डिंग केवल एक रुपये में वीर भारत न्यास को दे दी गई।

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कांग्रेस के भीतर मचे घमासान पर उठे सवाल

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि देश में दलालों की कमी नहीं है। दलालों का काम ही छोटे आरोप लगाना और इसके माध्यम से रुपये वसूली होता है। यह सब खेल दलालों का है।

दिग्विजय के इस बयान से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? कांग्रेस मोहन सरकार के विरुद्ध सड़क पर लड़ाई नहीं लड़ पा रही है और गलत आरोप भी लगा रही है।