भोपाल में बड़ा किसान आंदोलन, भोजताल कैचमेंट का विरोध, TNCP दफ्तर का घेराव करने पहुंचे 78 गांवों के किसान
भोजताल कैचमेंट एरिया के दायरे में आने वाले गांवों के किसान निजी जमीन और खेती पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के विरोध में शुक्रवार को सड़कों पर उतरेंगे...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 11:07:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 01:08:11 PM (IST)
तहसील हुजूर इकाई के बैनर तले सैकड़ों किसान दोपहर 12 बजे शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे हैं। नईदुनिया।।HighLights
- 78 से अधिक गांवों के किसान करेंगे प्रदर्शन
- दोपहर 12 बजे टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचेंगे किसा
- नियम लागू करने से पहले आपत्तियों पर विचार की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । भोजताल कैचमेंट एरिया के दायरे में आने वाले 78 से अधिक गांवों के किसानों की निजी जमीन और खेती पर मंडरा रहे खतरे के विरोध में भारतीय किसान संघ शुक्रवार को सड़कों पर उतर आया है।
तहसील हुजूर इकाई के बैनर तले सैकड़ों किसान दोपहर 12 बजे शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे हैं। यहां वो अपनी आपत्तियों को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे। तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने कहा कि कैचमेंट एरिया के नियमों से किसानों के अधिकार सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
किसी भी प्रावधान को लागू करने से पहले किसानों की वास्तविक स्थिति और आपत्तियों पर विचार होना चाहिए। उन्होंने सभी किसानों से एकजुट होकर हक की आवाज बुलंद करने की अपील की है।
1995 में कृषि था लैंडयूज, अब बदला जा रहा है भू-उपयोग
किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और 2031 के ड्राफ्ट प्लान में उनकी जमीन का लैंडयूज कृषि था। अब भू-उपयोग बदलने से खेती करना मुश्किल हो जाएगा। कृषि ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।
अगर जमीन संरक्षण की दूसरी श्रेणियों में शामिल होती है तो उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। किसानों की मांग है कि बीआइजेड 1 व 2 के प्रस्ताव को हटाया जाए और उनकी जमीन का भू-उपयोग कृषि ही रखा जाए।
क्या है BIZ 1-2 और क्यों है विरोध?
मास्टर प्लान में बीआईजेड का इस्तेमाल आमतौर पर बिजनेस या व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए किया जाता है। यह अलग-अलग श्रेणियों के व्यावसायिक उपयोग जैसे दुकानें, शॉपिंग मॉल, ऑफिस, गोदाम या छोटे उद्योगों को दर्शाता है।
किसानों का कहना है कि अगर उनकी कृषि भूमि को इस श्रेणी में डाल दिया गया तो वे वहां खेती नहीं कर पाएंगे। इसी कारण से किसान दोबारा भूमि का उपयोग कृषि करने की मांग कर रहे हैं।