'नहर दो नहीं तो जहर दो' वर्धा बांध से निकलने वाली नहर के लाभ से वंचित चार गांवों के किसानों ने किया प्रदर्शन
MP News: वर्धा बांध से निकलने वाली नहर के लाभ से वंचित चार गांवों के किसानों द्वारा मुलताई पहुंचकर नहर के लिए प्रदर्शन किया। किसानों ने एसडीएम से शीघ् ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 03 Feb 2026 09:23:45 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Feb 2026 09:27:46 AM (IST)
वर्धा बांध से निकलने वाली नहर के लाभ से वंचित चार गांवों के किसानों ने किया प्रदर्शनHighLights
- किसानों ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
- वर्षों बाद भी सिंचाई योजना का नहीं मिला लाभ
- भविष्य में और बड़ा प्रदर्शन किया जा सकता है
नवदुनिया न्यूज, मुलताई। वर्धा बांध से निकलने वाली नहर के लाभ से वंचित चार गांवों के किसानों द्वारा मुलताई पहुंचकर नहर के लिए प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने 'नहर दो नहीं तो जहर दो' के नारे लगाते हुए एसडीएम राजीव कहार को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने एसडीएम से शीघ्र नहर से गोपल तलाई, चौथिया, सोनोली और जाम गांव को जोड़ने की मांग की। किसानों ने कहा कि उनके गांव वर्धा डेम से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद उन्हें मुख्य नहर से नहीं जोड़ा गया। जबकि वर्धा डेम की नहर उनके गांवों से होकर आगे 30 से 40 किलोमीटर दूर अन्य गांवों तक पहुंचाई गई है।
किसानों ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित वर्धा सिंचाई परियोजना का लाभ अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी के चलते बांध के आसपास के क्षेत्र के किसानों को नहीं मिल रहा है। लाभ से वंचित किसानों में रोष पनप रहा है, जिससे भविष्य में और बड़ा प्रदर्शन किया जा सकता है।
शीघ्र नहर से जोड़ने की मांग की
परेशान किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सिंचाई विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान “नहर दो नहीं तो जहर दो” के नारों से तहसील परिसर गूंज उठा। चारों गांवों के किसान तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र नहर से जोड़ने की मांग की।
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वर्षों बाद भी सिंचाई योजना का नहीं मिला लाभ
किसानों ने आरोप लगाया कि आठ वर्षों बाद भी वर्धा सिंचाई परियोजना से आसपास के दर्जनों गांवों के लाभ से वंचित हैं। किसानों ने अपनी जमीनें परियोजना के लिए दीं, लेकिन आज भी वे बची हुई भूमि में सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं।
उन्होंने अधिकारियों की मिलीभगत से बिना समुचित नाप-तोल के निजी कंपनियों को पानी दिए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं ।