
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जुलाई जाते-जाते बदलते मौसम ने वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ा दिया है। इस बार एंट्रो, एडेनो और राइनो वायरस मरीजों को सबसे ज्यादा अपनी चपेट में ले रहे हैं। शहर के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पिछले 15 दिन में मरीजों की संख्या 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गई है।
जेपी, हमीदिया और खान शाकिर अली अस्पताल में रोजाना तेज बुखार, सर्दी, खांसी, बदन दर्द और उल्टी-दस्त के मरीज पहुंच रहे हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों को पैरासिटामोल, ओआरएस, एंटीबायोटिक और पैथोलॉजी किट का बफर स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं।
चिकित्सकों के अनुसार अभी चार वायरस एक्टिव हैं। एचटूएनटू इन्फ्लुएंजा होने पर तेज बुखार, सूखी खांसी, शरीर दर्द होता है। एडेनो वायरस में बुखार के साथ आंख लाल होना और उल्टी होती है। राइनो वायरस से सामान्य सर्दी-जुकाम, गले में खराश होती है। जबकि एंट्रो वायरस बच्चों में उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार करता है।
जेपी अस्पताल की रोजाना ओपीडी 800 से बढ़कर 1100 पार हो गई। अकेले 400 मरीज वायरल के हैं। हमीदिया अस्पताल में मेडिसिन और पीडियाट्रिक ओपीडी में 35% बढ़ोतरी दर्ज है। रोज 600 से 650 मरीज आ रहे हैं। खान शाकिर अली अस्पताल में रोज 600 से 800 मरीज आ रहे हैं। इनमें 15-20% वायरल के हैं।
जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. पुष्पेंद्र मिश्रा का कहना है कि वायरल तीन से पांच दिन में ठीक हो जाता है। लेकिन तीन दिन दवा के बाद भी 101 डिग्री से ज्यादा बुखार रहे या सात दिन तक बुखार बना रहे तो सीबीसी, डेंगू और टायफाइड की जांच कराएं। खुद से एंटीबायोटिक न लें।
खान शाकिर अली अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. प्रितेश सिंह ठाकुर का कहना है कि इस बार प्लेटलेट्स गिरने के केस भी आ रहे हैं। बुखार के साथ रैश, पेट दर्द या उल्टी हो तो तुरंत अस्पताल आएं। पैरासिटामोल दिन में तीन बार से ज्यादा न लें और खूब पानी पिएं।
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सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि सभी शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। दवा और डेंगू किट का पर्याप्त स्टॉक है। अस्पतालों में बेड की कमी नहीं है।
निजी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि रैपिड कार्ड टेस्ट पॉजिटिव आने पर उसकी पुष्टि एलाइजा जांच से जरूरी है। तभी रिपोर्ट को अंतिम माना जाएगा। लोग घर के आसपास पानी जमा न होने दें। डॉक्टरों की सलाह है कि बुखार में आराम करें, तरल पदार्थ लें। तीन दिन में आराम न हो तो जांच जरूर कराएं।