आधी रात अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, इमरजेंसी मॉकड्रिल से मचा हड़कंप
रात 12 बजे जब अस्पताल का स्टाफ गहरी नींद या सुस्ती में था, तब अचानक टीम ने पहुंचकर एक गंभीर गर्भवती महिला के आने की सूचना दी, जिससे अस्पताल में खलबली ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 03:54:29 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 03:56:09 PM (IST)
इमरजेंसी मॉकड्रिल से मचा हड़कंपHighLights
- आधी रात अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
- बिना सूचना अस्पताल पहुंच गया निरीक्षण दल
- हाई रिस्क गर्भवती का केस बताकर परखा रिस्पॉन्स टाइम
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी कॉल पर डॉक्टर कितनी मुस्तैदी से अस्पताल पहुंचते हैं, इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की टीम ने शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात सिविल अस्पताल बैरागढ़ में 'सीक्रेट ऑपरेशन' चलाया। रात 12 बजे जब अस्पताल का स्टाफ गहरी नींद या सुस्ती में था, तब अचानक टीम ने पहुंचकर एक गंभीर गर्भवती महिला के आने की सूचना दी, जिससे अस्पताल में खलबली मच गई।
सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा के निर्देश पर की गई यह मॉकड्रिल इतनी गोपनीय थी कि अस्पताल अधीक्षक तक को इसकी भनक नहीं लगने दी गई। निरीक्षण दल ने ड्यूटी डॉक्टर और नर्स को सख्त हिदायत दी कि टीम के आने की जानकारी किसी को न दी जाए।
स्टाफ को बताया गया कि एक हाई रिस्क गर्भवती महिला अस्पताल आ रही है, जिसे तत्काल सिजेरियन की जरूरत है। 30-40 मिनट में दौड़े आए विशेषज्ञ सूचना मिलते ही ड्यूटी डॉक्टर ने तत्काल ऑन-कॉल विशेषज्ञों को फोन किया।
देखते ही देखते अगले 30 से 40 मिनट के भीतर स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ और ओटी इंचार्ज मौके पर पहुंचे। ऑपरेशन थिएटर को तुरंत चालू किया गया और ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता जांची गई।
जब ऑपरेशन की सभी तैयारियां पूरी हो गईं, तब टीम ने खुलासा किया कि यह कोई वास्तविक मरीज नहीं बल्कि व्यवस्थाएं जांचने के लिए की गई एक मॉकड्रिल थी। निरीक्षण दल ने ऑन-कॉल डॉक्टर्स की मुस्तैदी पर संतोष जताया लेकिन व्यवस्थाओं को और पुख्ता करने के निर्देश दिए। अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश-सभी स्टाफ और डॉक्टर्स को रोस्टर का सख्ती से पालन करना होगा।
- ऑन-कॉल डॉक्टर्स के पास वैकल्पिक फोन नंबर रखने को कहा गया है ताकि नेटवर्क समस्या होने पर भी संपर्क हो सके।
- कॉल के बाद डॉक्टर के पहुंचने का समय कम से कम रखने के निर्देश।
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इनका कहना है
आकस्मिक स्थितियों में रिस्पान्स टाइम ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। यह माकड्रिल यह जानने के लिए थी कि हमारा स्टाफ आपात स्थिति के लिए कितना तैयार है। ऐसी औचक कार्रवाइयां आगे भी जारी रहेंगी- डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल।