
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। महिलाओं को सर्विकल कैंसर से बचाने के लिए ह्यूमन पिपलोमा वायरस (एचपीवी) रोधी वैक्सीन लगाने की शुरुआत शनिवार को मध्य प्रदेश में भी हुई। यहां 14 से 15 वर्ष तक की आठ लाख किशोरियों को टीका की एकमात्र डोज दी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अभिभावक अपनी बेटियों का टीकाकरण अवश्य कराएं। वह अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को दिल्ली से वर्चुअल संबोधित कर रहे थे।
केंद्र से सात लाख 58 हजार 500 वैक्सीन डोज प्राप्त हो चुके हैं। यह टीका 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की पात्र बालिकाओं को लगाया जाएगा। बाज़ार में लगभग चार हजार रुपये कीमत वाला यह टीका चिह्नित शासकीय संस्थानों में निश्शुल्क लगाया जाएगा। अभियान अगले तीन माह तक चलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों और युवाओं के उपचार के लिए सभी जिला अस्पतालों में साप्ताहिक क्लीनिक संचालित होंगे, जहां इंसुलिन उपलब्धता, जांच और विशेषज्ञ परामर्श मिलेगा।
प्रदेश में भोपाल के डॉ. कैलाशनाथ काटजू अस्पताल से अभियान का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य) राजेंद्र शुक्ल ने कहा, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्विकल कैंसर दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। यह एक लाख महिलाओं में लगभग 156 को होता है।
प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण प्रतिदिन प्रातः नौ से दोपहर दो बजे तक लगाया जाएगा। टीकाकरण स्वैच्छिक है तथा अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होगी। अभियान प्रारंभ होने के 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष पूर्ण करने वाली बालिकाएं भी पात्र होंगी।
समस्त जिलों के लगभग 471 स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी में टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण हेतु सभी पात्र किशोरियों का यूविन पोर्टल में पंजीयन किया जाएगा। हितग्राही अपने पहचान-पत्र तथा अभिभावक के मोबाइल नंबर से स्वयं पंजीयन कर सकते हैं।
टीकाकरण के बाद बालिका को 30 मिनट तक स्वास्थ्य केंद्र में अवलोकन में रखा जाएगा। बालिका खाली पेट नहीं हो, यह भी देखना होगा। डाक्टरों ने बताया कि टीका के बाद संभावित हल्के दुष्प्रभाव जैसे इंजेक्शन स्थल पर दर्द, सिरदर्द या थकान सामान्य हैं और शीघ्र ठीक हो जाते हैं।
टाइप-1 मधुमेह में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता, जिससे आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है। मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में साप्ताहिक विशेष टाइप-1 डायबिटीज क्लीनिक प्रारंभ किए जा रहे हैं, जहां इंसुलिन की उपलब्धता, ब्लड ग्लूकोज जांच, विशेषज्ञ परामर्श एवं नियमित फालोअप की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी।
मिशन के अंतर्गत 16 जिलों के 759 किशोर-किशोरियों को टीडी (टाइप-1 डायबिटीज) किट दी जा रही है। इसमें ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स तथा आवश्यक उपकरण हैं, ताकि बच्चे समय पर शुगर की जांच कर सकें और बीमारी को नियंत्रित रख सकें।