MP में IAS-IPS अधिकारियों में 41 प्रतिशत इंजीनियर-डॉक्टर, 399 आइएएस अधिकारियों में से 98 महिलाएं
मध्य प्रदेश में वर्तमान में 660 आइएएस और आइपीएस अधिकारी पदस्थ हैं। इनमें 269 यानी 41 प्रतिशत इंजीनियर या डाक्टर हैं। कुछ ने तो बीटेक-बीई से आगे एमटेक ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 20 Apr 2026 06:36:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Apr 2026 06:36:39 PM (IST)
ब्यूरोक्रेसी में 'इंजीनियरिंग-मेडिकल' का दबदबा।HighLights
- ब्यूरोक्रेसी में 'इंजीनियरिंग-मेडिकल' का दबदबा
- 660 अधिकारियों में 269 इंजीनियर और डॉक्टर
- वरिष्ठ अधिकारियों में तकनीकी दिग्गजों की भरमार
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भले ही हमें लगता है कि आइआइटी या बड़े तकनीकी संस्थानों में पढ़कर निकलने वाला व्यक्ति इंजीनियर बनेगा और डाक्टरी की पढ़ाई करने वाला डाक्टर ही, पर ऐसा नहीं है। बड़े संस्थानों से तकनीकी और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले बहुत सारे युवाओं को भी सिविल सेवा का आकर्षण अपनी ओर खींच लेता है।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में 660 आइएएस और आइपीएस अधिकारी पदस्थ हैं। इनमें 269 यानी 41 प्रतिशत इंजीनियर या डाक्टर हैं। कुछ ने तो बीटेक-बीई से आगे एमटेक या एमई की पढ़ाई की है। इसी तरह, डाक्टरों में एमबीबीएस के अतिरिक्त कुछ एमडी-एमएस भी हैं।
विषय चयन और शैक्षणिक योग्यता का महत्व
आज नहीं, बल्कि वर्ष 1979 से सिविल सेवा में इंजीनियरिंग विषय शामिल किया गया था, तभी से इनका बोलबाला है। हां, अब बीए-एलएलबी का महत्व बढ़ने के बाद ला की पढ़ाई करने वालों की भी सिविल सेवा में संख्या बढ़ी है। वर्तमान में प्रदेश में 15 आइएएस अधिकारी एलएलबी या एलएलएम हैं। इंजीनियर और डाक्टर दिमाग का लाभ उनकी तैनाती वाले विभाग को भी मिलता है।
मध्य प्रदेश में अधिकारियों की पदस्थापना में यह देखा जाता है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार पद दिया जाए। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग में आइएएस संवर्ग के दो से तीन अधिकारी हर समय पदस्थ किए जाते हैं, जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की होती है।
आइएएस संवर्ग के आंकड़े और विविधता
प्रदेश में आइएएस अधिकारियों के 459 पद हैं, जिनमें अभी 399 कार्यरत हैं। बाकी पद रिक्त हैं। इनमें 168 इंजीनियर, 16 एमबीबीएस व दो बीडीएस डाक्टर और 15 विधि स्नातक हैं। अच्छी बात यह कि पदस्थ 399 आइएएस अधिकारियों में 98 महिलाएं हैं। यानी महिलाओं की संख्या 25 प्रतिशत है। प्रदेश के 55 जिलों में 17 में महिलाओं को कलेक्टरी सौंपी गई है, यानी 30 प्रतिशत जिलों में उनकी पदस्थापना है।
इससे साफ है कि कुल आइएएस अधिकारियों में उन्हें अनुपात से भी अधिक अनुसार तैनाती सुनिश्चित की गई है। वरिष्ठता क्रम में शीर्ष 30 आइएएस अधिकारियों में 20 इंजीनियर हैं। प्रदेश में सबसे कम उम्र के आइएएस अधिकारी वर्ष 2024 बैच के कुलदीप पटेल 24 वर्ष के हैं।
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आइपीएस की वर्दी में 80 इंजीनियर और 9 डाक्टर
प्रदेश में आइपीएस संवर्ग के 319 पद हैं। वर्तमान में इनके विरुद्ध 261 पदस्थ हैं। इनमें 80 से अधिक इंजीनियर और नौ डाक्टर हैं। वरिष्ठता में शीर्ष 17 आइपीएस अधिकारियों में 10 इंजीनियर हैं। कुछ बैच में तो एक-दो छोड़ सभी इंजीनियर ही हैं। इंजीनियरिंग भी आइआइटी या अन्य बड़े संस्थानों से की है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मैंने स्वयं इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 12वीं के बाद जो क्रीम बच्चे होते हैं, कोई न कोई प्रोफेशनल डिग्री करते हैं। इनमें पहली पसंद इंजीनियरिंग है। दूसरे नंबर पर मेडिकल है। आज कल ला वालों की भी रुचि बढ़ी है। आईआईटी से पढ़ने वाले 70 प्रतिशत से अधिक देश से बाहर चले जाते हैं। कुछ सिविल सेवा पसंद करते हैं, जिससे उनके चयन की संभावना बढ़ जाती है।- राजेश गुप्ता, सेवानिवृत एडीजी