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कान्हा रिजर्व में 6 बाघों की मौत के बाद एक्शन, वायरस रोकने के लिए 169 गांवों में कुत्तों को दिया जा रहा बूस्टर डोज

छह बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने संक्रमण रोकने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है।

By Sourabh SoniEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 05:28:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 05:28:51 PM (IST)
कान्हा रिजर्व में 6 बाघों की मौत के बाद एक्शन, वायरस रोकने के लिए 169 गांवों में कुत्तों को दिया जा रहा बूस्टर डोज
कान्हा रिजर्व में 6 बाघों की मौत के बाद एक्शन( फाइल फोटो)

HighLights

  1. टाइगर रिजर्व के 169 गांवों में 2,841 कुत्तों का टीकाकरण, 1,407 को बूस्टर डोज
  2. छह बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने संक्रमण रोकने के लिए अभियान तेज किया
  3. बाघों और तेंदुओं के टीकाकरण की संभावना पर भी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है

सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल । कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से छह बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने संक्रमण रोकने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। चरणबद्ध रणनीति के तहत रिजर्व से लगे गांवों में कुत्तों का टीकाकरण किया गया था। अब उन्हें बूस्टर डोज लगाया जा रहा है। अब तक 169 गांवों में चिह्नित 2,841 कुत्तों में से 1,407 को बूस्टर डोज लगाया जा चुका है। वन विभाग का मानना है कि कुत्ते इस वायरस के प्रमुख वाहक हैं, इसलिए उनका टीकाकरण संक्रमण रोकने के लिए जरूरी है।

संक्रमण रोकने के लिए कई कदम

वन विभाग ने कान्हा टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में लोगों को जागरूक करने के साथ हाथियों की मदद से गश्त बढ़ाई है। बफर और कोर क्षेत्र के उन हिस्सों में तार फेंसिंग की जा रही है, जहां कुत्तों की आवाजाही अधिक रहती है। इसके अलावा वन्यजीवों की स्वास्थ्य निगरानी मजबूत की गई है और पशुपालन विभाग, स्थानीय निकायों तथा अन्य एजेंसियों के सहयोग से समन्वित टीकाकरण अभियान चलाया गया है।


वन विभाग ने बफर क्षेत्रों में घरेलू पशुओं की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई है। साथ ही फ्रंटलाइन कर्मचारियों को संक्रमण की पहचान, रिपोर्टिंग और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जैविक नमूनों की समय पर जांच और विश्लेषण भी कराया जा रहा है।

बाघों के टीकाकरण पर भी विचार

वन विभाग अब बाघों और तेंदुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों पर भी विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है। इसके तहत भविष्य में बाघों के टीकाकरण की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

ऐसे फैलता है वायरस

विशेषज्ञों के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से कुत्तों से फैलता है। गर्मी के मौसम में छोटे जल स्रोतों से कुत्तों और वन्यजीवों के पानी पीने से संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा यदि बाघ या तेंदुए के शिकार को पहले संक्रमित कुत्ता खा ले और बाद में वही शिकार बाघ या तेंदुआ खाए, तब भी वायरस फैलने की आशंका रहती है।

जिम्मेदारों का क्या कहना है

मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में वायरस की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। हाथियों के साथ नियमित गश्त की जा रही है और कुत्तों को रिजर्व क्षेत्र से दूर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। 169 गांवों में प्रथम चरण का टीकाकरण पूरा हो चुका है और अब बूस्टर डोज लगाया जा रहा है। प्रदेश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में भी इसी प्रकार की सावधानियां बरती जा रही हैं।

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