
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने गुरुवार रात रीनीट-2026 का रिजल्ट जारी कर दिया। परीक्षा 21 जून को हुई थी, जिसमें भोपाल में 32 केंद्रों में करीब 13 लाख अभ्यर्थी बैठे थे। परीक्षा में कई विद्यार्थियों ने सफलता अर्जित की है।
नीट में इस बार शासकीय सुभाष एक्सीलेंस स्कूल के सुपर 100 के विद्यार्थी और मजदूर माता-पिता के बेटे आदर्श लोधी ने एआइआर 304 अर्जित कर सिटी टॉपर का खिताब हासिल किया है। दूसरे स्थान पर अरुणिमा प्रियंबदा दास हैं, जिन्होंने एआइआर 1058 हासिल किया है। तीसरे टॉप परफॉर्मर में सुभाष एक्सीलेंस स्कूल के ही तीर्थ सोनी हैं, जिन्होंने एआइआर 1299 हासिल की है।
टॉप स्कोरर्स का मानना है कि तैयारी के दौरान इंटरनेट मीडिया से दूरी बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह ध्यान भटकाता है। पढ़ाई के भारी तनाव को दूर करने के लिए इन विद्यार्थियों ने मोटिवेशनल गाने सुने, माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों से बातचीत की, तो कुछ ने यूट्यूब वीडियो और ऑनलाइन गेम्स का सहारा लिया। निरंतरता, शिक्षकों के मार्गदर्शन पर विश्वास और सकारात्मक सोच ही उनकी सफलता के मार्गदर्शक बने।
मुझे 200 के अंदर ऑल इंडिया रैंक आने की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम मेरी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आया। यह मेरा दूसरा प्रयास था। मैंने रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी को दिए। शिक्षकों के मार्गदर्शन का पूरी तरह पालन करना ही मेरी सफलता का मंत्र रहा। तनाव दूर करने के लिए मैं दोस्तों से बातें करता था। परीक्षा से पहले मैं किसी भी इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं था, परीक्षा समाप्त होने के बाद ही मैंने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बनाया है।
मैं मूलतः रायसेन जिले सिलवानी का रहने वाला हूं। पिता भगवान सिंह लोधी और मां रेवा लोधी कृषक मजदूर हैं। आर्थिक अभाव के बीच मैंने स्कूलिंग और नीट की तैयारी की है। कक्षा 11वीं से सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में दाखिला न होता तो यह सफर आसान नहीं था। अब मैं एमबीबीएस करने के बाद ऑन्कोलॉजी से एमडी करूंगा। मुझे एक अच्छा ऑन्कोलॉजिस्ट बनकर कैंसर रोग का निदान करना है। मेरा एक छोटा भाई और एक छोटी बहन है। दोनों गांव के ही स्कूल में पढ़ते हैं। दसवीं तक की मेरी पढ़ाई भी गांव के सरकारी स्कूल में हुई है।
यह मेरा पहला प्रयास था। मैंने किसी खास रैंक की उम्मीद नहीं की थी। मेरी कोशिश बस इतनी थी कि किसी अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लायक अंक मिल जाएं। लगातार अभ्यास ही मेरी सफलता की कुंजी है। शुरुआती महीनों में मैं रोजाना 4-5 घंटे पढ़ती थी, लेकिन परीक्षा पास आते ही मैंने इसे बढ़ाकर आठ से 10 घंटे कर दिया। हालांकि पढ़ाई के लिए मैंने भी घंटे तय नहीं किए। जब तक समझ में न आ जाए दो-दो घंटे में ब्रेक लेकर लगातार पढ़ती थी।
नीट की तैयारी में फिजिक्स मुझे टफ लगा तो ज्यादा प्रैक्टिस करके मैंने विषय संबंधी बाधा दूर की। तनाव कम करने के लिए मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों से बात करती थी। मेरे पिता प्रियरंजन दास बैंकर हैं और मां गृहिणी हैं। मैं भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) बनना चाहती हूं।
मैं भोपाल का रहने वाला हूं। नीट यह मेरी दूसरी कोशिश थी। मैं न्यूरोसर्जन बनना चाहता हूं। मेरे पिता ड्राइवर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। "आशावाद" ही मेरी सफलता का मंत्र था। मैं रोजाना छह घंटे से ज्यादा समय खुद पढ़ाई करने में लगाता था। जब भी मुझे तनाव महसूस होता, तो मैं अपने माता-पिता से बात करता था, जो मेरा हौसला बढ़ाते थे। मैं इंटरनेट मीडिया पर नहीं हूं। अपनी सफलता का श्रेय शासकीय सुभाष एक्सीलेंस स्कूल और सुपर 100 को देना चाहूंगा। वहीं पर पढ़ाई करने के बाद नीट की राह आसान हुई है।
नीट के लिए मेरा यह दूसरा प्रयास था। मैं अंडर-1000 रैंक की उम्मीद कर रही थी, लेकिन जो रैंक मिली है, उससे भी खुश हूं। मूल परीक्षा और री-टेस्ट के बीच का समय काफी तनावपूर्ण और अनिश्चितताओं से भरा था। ऐसे में लगातार मेहनत और इस विश्वास ने मेरा साथ दिया कि जो भी हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। मैं विचलित नहीं हुई। तैयारी के दौरान मैं इंटरनेट मीडिया से पूरी तरह दूर रही और तनाव दूर करने के लिए मोटिवेशनल गाने सुनती थी। मैंने रोजाना करीब छह घंटे सेल्फ स्टडी को दिए। मैं मूलतः चित्रकूट की रहने वाली हूं। पापा अटल बिहारी बिजनेस मैन और मां गृहिणी हैं।
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न्यू मार्केट निवासी श्रेयांश जेना ने नीट-2026 में पहले ही प्रयास में 646 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 1775 प्राप्त की। इससे पहले वह जेईई मेन में भोपाल के टॉपर रहे और उनका चयन आईआईटी खड़गपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स व कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के लिए हुआ है। अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।