
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भारत सरकार की डिजिटल पहल ज्ञान भारतम् अभियान के तहत दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों के पंजीकरण और संरक्षण के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार तीन जुलाई तक ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि शेष का चरणबद्ध तरीके से परीक्षण और प्रमाणीकरण किया जा रहा है।
अभियान को भी मजबूती प्रदान की है
अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि आज भी देश और दुनिया के मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों तथा संग्रहालयों में संरक्षित पांडुलिपियां भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण, डिजिटलीकरण और पुनर्प्रसार प्राचीन ज्ञान-संपदा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के जिलों के प्रयासों ने न केवल प्रदेश की ज्ञान परंपरा के संरक्षण को नई दिशा दी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस अभियान को भी मजबूती प्रदान की है।
भोपाल में सबसे अधिक, डिंडोरी में सबसे कम पंजीकरण
ज्ञान भारतम् अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। एक जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में सबसे अधिक 24,26,172 पांडुलिपियों का पंजीकरण हुआ है। इसके बाद इंदौर में 3,99,477, रीवा में 2,68,763, बैतूल में 1,00,593 और छिंदवाड़ा में 77,094 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया गया।
इन जिलों में इतनी पांडुलिपिया सुरक्षित
इसके अलावा पन्ना में 64,257, सागर में 60,025, ग्वालियर में 29,870, उज्जैन में 20,995, रायसेन में 15,539, मंदसौर में 12,412, अनूपपुर में 11,829, नीमच में 8,950, मऊगंज में 8,406, खंडवा में 5,740, जबलपुर में 4,715, सतना में 4,061, नर्मदापुरम में 4,049, गुना में 3,937, उमरिया में 3,824, दतिया में 3,179, विदिशा में 2,745, सीधी में 2,497, अशोकनगर में 1,908, बालाघाट में 1,741, शहडोल में 1,397, टीकमगढ़ में 1,290, मंडला में 957, शिवपुरी में 943, धार में 870, भिंड में 800, रतलाम में 731, मुरैना में 655, शाजापुर में 638, बड़वानी में 614, सीहोर में 607, सिवनी में 564, छतरपुर में 381, देवास में 330, श्योपुर में 310, नरसिंहपुर में 254, राजगढ़ में 198, निवाड़ी में 177, खरगोन में 171, मैहर में 146, दमोह में 133, बुरहानपुर में 120, हरदा में 84, कटनी में 83, आगर मालवा में 57, सिंगरौली में 33, झाबुआ में 17, अलीराजपुर में 8, पांढुर्ना में 3 तथा डिंडोरी में एक पांडुलिपि का पंजीकरण किया गया।