
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन को रोकने के लिए राज्य सरकार नया प्रयोग करने जा रही है। खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर फास्टैग लगाया जाएगा। इसे स्कैन करते ही वाहन में लोड किए गए खनिज की मात्रा, कौन सा खनिज है, कब लोड हुआ और कहां सप्लाई होगा, इसकी पूरी जानकारी पता चल जाएगी। फास्टैग लगे वाहनों के ई-चेक गेट से गुजरते ही पूरी जानकारी देखी जा सकेगी। अवैध परिवहन व वाहन ओवरलोड है तो भी आसानी से इसका पता चल जाएगा। खनिज विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा फास्टैग स्टीकर, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) तकनीक पर काम करेगा, इसे वाहनों की विंडस्क्रीन पर लगाना अनिवार्य होगा। वाहन पर मालिक स्वयं के व्यय पर यह आइटी आधारित फास्टैग लगाएगा।
इधर, राज्य सरकार ने प्रदेश में लगाए 40 ई-चेक गेट को शुरू करने के लिए नियमों में जरूरी संशोधन भी किया है। खनिज साधन विभाग द्वारा खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 में संशोधन के बाद नई व्यवस्था में मानवरहित ई-चेक गेट से खनिज परिवहन के वाहनों की निगरानी की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर आनलाइन तरीके से ही कार्रवाई भी की जा सकेगी।
ई-चेक गेट से मिली जानकारी के विश्लेषण पर खनिज परिवहन में अनियमितता मिलने पर वाहन मालिक पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। नियमों के उल्लंघन पर वाहन का पंजीयन तक रद्द कर दिया जाएगा। संबंधित जिले के कलेक्टर वाहन जब्त करने के निर्देश दे सकेंगे। पूर्व की तरह ही पेनल्टी भी लगाई जाएगी।
मध्य प्रदेश के अलावा भारत के कई राज्यों में भी तकनीकी स्तर पर खनिजों की चोरी रोकने के लिए इसी तरह की आरएफआइडी टैग, जीपीएस और आटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) व्यवस्था है। राजस्थान सरकार ने खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहनों के लिए जीपीएस और आरएफआइडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) सिस्टम अनिवार्य किया है। फास्टैग भी इसी आरएफआइडी तकनीक पर काम करता है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने भी खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन को पूरी तरह डिजिटल तरीके से ट्रैक करने के लिए वाहनों की ट्रैकिंग और आधुनिक मानिटरिंग सिस्टम (आरएफआइडी व जीपीएस) को लागू किया है। बिहार में अवैध खनिज रोकने के लिए आधुनिक चेकपोस्ट और ई-ट्रांजिट पास (ईटीपी) व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया गया है, जहां राज्य की सीमाओं पर आटोमेटेड सिस्टम के जरिए वाहनों के दस्तावेजों और नंबरों का मिलान किया जाता है।
ओडिशा और झारखंड राज्यों में भी खनिज संपदा की सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटेड माइन्स एंड मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम के तहत परिवहन वाहनों पर विशेष रूप से ट्रैकिंग सिस्टम और बारकोड/आरएफआइडी आधारित डिजिटल गेट पास लागू किए गए हैं।
प्रदेश में खनिज परिवहन में चार लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें ट्रक, ट्रैक्टर व अन्य भारी वाहन है। इनको शार्टलिस्ट कर रहे हैं। जो वाहन वर्तमान में संचालित हैं, उनमें फास्टैग आरएफआइडी आधारित डिजिटल गेट पास लगाएंगे। इस पर काम कर रहे हैं, आगामी 15 दिनों में प्रक्रिया पूरी कर यह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।- फ्रेंक नोबल ए, एमडी खनिज निगम, संचालक प्रशासन एवं खनिज