
टीम नईदुनिया, मालवा-निमाड़। मालवा-निमाड़ में सोमवार को आई आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मंगलवार को नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आई तो कई जिलों में खेतों में तैयार फसलें धराशायी मिलीं, मंडियों में कृषि उपज भीगी और बागानों में हजारों पौधे जमीन पर बिछे नजर आए। सबसे ज्यादा मार बुरहानपुर और खरगोन के केला उत्पादकों पर पड़ी है, जबकि मंदसौर, शाजापुर और नीमच में भी किसानों और व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा। बुरहानपुर में 80 प्रतिशत केला फसल बर्बाद होने का दावा किया गया है।

बुरहानपुर जिले में सोमवार शाम चली आंधी और करीब डेढ़ घंटे की तेज बारिश ने केला उत्पादक किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लोनी, बिरोदा, मांजरोद खुर्द, दापोरा, शाहपुर और नेपानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में केले के पौधे गिर गए। जिले में 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केला उत्पादन होता है। किसानों का कहना है कि मौसम आधारित फसल बीमा का लाभ पिछले आठ वर्षों से नहीं मिल रहा है। कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने और शीघ्र मुआवजे की मांग की है।
खरगोन जिले में तेज आंधी से केले की फसल को भारी नुकसान हुआ। किसान धर्मेंद्र सिंह चौहान और जीवनबाई शेरसिंह के अनुसार पांच एकड़ खेत में लगाए गए करीब सात हजार पौधों में से साढ़े छह हजार पौधे धराशायी हो गए। फसल फल देने की स्थिति में थी। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
शाजापुर, शुजालपुर, कालापीपल, गुलाना और अकोदिया क्षेत्र में तेज बारिश हुई। अकोदिया में खुले में रखी कृषि उपज भीग गई, जबकि ईंट भट्टों पर रखी कच्ची ईंटें खराब हो गईं। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से आवागमन प्रभावित रहा।
मंदसौर और शामगढ़ मंडी में बारिश के कारण किसानों की कृषि उपज भीग गई। पिपलियामंडी और गरोठ क्षेत्र में तेज हवा से पेड़ गिर गए तथा बिजली तार टूटने से घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही।
नीमच जिले के कुकड़ेश्वर, मनासा, महागढ़ और रतनगढ़ क्षेत्रों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। तेज बारिश से ग्वालटोली क्षेत्र के ईंट भट्टों पर रखी कच्ची ईंटों को नुकसान पहुंचा। पेड़ गिरने की घटनाओं से भी आंशिक नुकसान हुआ। झाबुआ जिले में 32.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। आंधी और बारिश के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित रही, लेकिन फिलहाल किसी बड़े कृषि नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
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