MANIT भोपाल में PhD के नियम बदले: अब पेटेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से भी मिलेगी डिग्री, रिसर्च पेपर की अनिवार्यता खत्म!
MANIT Bhopal PhD New Rules: मैनिट भोपाल ने नई शिक्षा नीति के तहत पीएचडी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 23 Feb 2026 07:40:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 23 Feb 2026 07:40:34 PM (IST)
MANIT का 'प्रैक्टिकल पीएचडी मॉडल': 3 साल से पहले पूरी होगी रिसर्च। (AI Generated Image)HighLights
- नई खोज का पेटेंट रिसर्च पेपर के बराबर
- शोध बेहतर होने पर 3 साल पूर्व डिग्री संभव
- ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर फोकस
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) ने अपने शोध नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब पीएचडी डिग्री (PhD New Rules) के लिए केवल रिसर्च पेपर पब्लिश करना अनिवार्य नहीं होगा, यदि छात्र पेटेंट हासिल करता है या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (तकनीक का व्यावसायिक हस्तांतरण) करता है, तो उसे डिग्री के योग्य माना जाएगा।
अब शोध विषय राष्ट्रीय महत्व के आधार पर चुने जाएंगे और उत्कृष्ट कार्य होने पर तीन साल से पहले भी थीसिस जमा की जा सकेगी। अभी तक पीएचडी के लिए थीसिस अनिवार्य थी, लेकिन थीसिस का उपयोग बहुत कम होता है।ऐसे में जो लोगों के काम आए ऐसी बौद्धिकता पर जोर दिया गया है।
इस प्रैक्टिकल PhD मॉडल का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा को रोजगारमुखी और नवाचार से भरपूर बनाना है। स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना और शिक्षा को नवाचार युक्त बनाना है।
मैनिट का यह ''प्रैक्टिकल पीएचडी मॉडल'' विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।मैनिट की सीनेट में पास होने के बाद यह बदलाव इसी सत्र से लागू कर दिए गए हैं।
प्रमुख बदलाव जो विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद होंगे
- पेटेंट को मान्यता: अगर आपने शोध के दौरान कोई नई खोज की है और उसका पेटेंट कराया है, तो उसे ''क्वालिटी रिसर्च पेपर'' माना जाएगा।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: यदि छात्र की बनाई तकनीक का उपयोग कोई कंपनी या उद्योग करता है (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर),तो उसे पीएचडी की डिग्री के लिए पर्याप्त माना जाएगा।
- तीन साल से पहले पीएचडी: यदि किसी छात्र का शोध कार्य बेहतर और तेज है, तो उसे तीन साल का समय पूरा होने से पहले भी थीसिस जमा करने की छूट मिल सकेगी।इससे विद्यार्थी की पीएचडी तीन से पहले ही पूरी हो जाएगी। अभी रिसर्च पूरी होने के बाद भी तीन साल से पहले पीएचडी की डिग्री नहीं दी जाती थी।
- राष्ट्रीय महत्व के विषय:अब पीएचडी और एमटेक के विषयों का चुनाव राष्ट्रीय महत्व के विषय (ऊर्जा, डिजिटल सुरक्षा, मेक इन इंडिया) के आधार पर होगा।
- स्टार्टअप को बढ़ावा:संस्थान अब शोध को लैब से निकालकर बाजार तक ले जाने और छात्रों को अपनी कंपनी (स्टार्टअप) शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
हमारा उद्देश्य PhD को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक बनाना है। अब छात्र ऐसा काम करेंगे जिससे देश को सीधी मदद मिले और वे खुद रोजगार देने वाले बनें।हमारी फैकल्टी और स्टूडेंट की काबिलियत के आधार पर ये सुधार विकसित भारत अभियान को पाने के लिए नए माइलस्टोन तय करेंगे।
-प्रो शैलेंद्र जैन, डीन ऐकेडमिक, मैनिट