• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

भोपाल की सड़कों को जाम से मिलेगी मुक्ति... मेट्रो स्टेशनों के पास 500 मीटर में बनेंगे बहुमंजिला दफ्तर और घर

मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में मेट्रो लाइन के दोनों ओर 500-500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां घर, द...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 08:49:34 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 10:25:08 PM (IST)
भोपाल की सड़कों को जाम से मिलेगी मुक्ति... मेट्रो स्टेशनों के पास 500 मीटर में बनेंगे बहुमंजिला दफ्तर और घर
मेट्रो के 500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव (AI Image)

HighLights

  1. मेट्रो के 500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव
  2. छोटे प्लॉट मिलाकर ऊंची इमारतें और मिश्रित निर्माण संभव होगा
  3. बुनियादी ढांचे और सीवरेज-पार्किंग पर दबाव बढ़ने की आशंका

अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। मेट्रो के आसपास के इलाके को प्रदेश सरकार आने वाले सालों में पूरी तरह नए अंदाज में विकसित करने की योजना बना रही है। मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में मेट्रो लाइन के दोनों ओर 500-500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां घर, दुकान, बाजार, दफ्तर और दूसरी जरूरी सुविधाएं आसपास बनाने की योजना है। यानी मेट्रो स्टेशन के आसपास ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े।

पुराने निर्माणों के पुनर्विकास और ऊंची इमारतों का प्रस्ताव

इसका एक बड़ा बदलाव पुराने भवनों और बस्तियों में देखने को मिल सकता है। ड्राफ्ट में पहले से बने भवनों और पुराने निर्माण को दोबारा विकसित करने की गुंजाइश रखने का प्रस्ताव है। जरूरत और तय नियमों के अनुसार एक भूखंड पर पहले से ज्यादा निर्माण किया जा सकता है। ऊंची इमारतों को भी जगह मिल सकती है। इसके साथ एक ही इलाके में घर और दुकान या घर और कार्यालय जैसी अलग-अलग गतिविधियां चलाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।


हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो वाले क्षेत्रों में नए नियमों को लागू करने से पुराने और घने इलाकों में ज्यादा इमारतें बनने से सड़क, पार्किंग और सीवरेज पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को पहले उन क्षेत्रों को चिह्नित करना चाहिए, जहां इस तरह की गतिविधियां संभव हो सकें।

छोटे भूखंड मिलाकर बड़ा निर्माण और मिश्रित उपयोग

मेट्रो के आसपास कुछ पुराने स्वीकृत भूखंडों को आपस में जोड़कर बड़ा भूखंड बनाने की अनुमति का भी प्रस्ताव है। खासकर 12 मीटर या इससे ज्यादा चौड़ी सड़क से लगे भूखंडों पर मिश्रित उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। इसका मतलब है कि ऐसे स्थानों पर एक ही परिसर में रहने के साथ दुकान या कार्यालय भी बनाया जा सकता है। लेकिन ज्यादा निर्माण के साथ सड़क और दूसरी सुविधाओं पर दबाव न बढ़े, इसके लिए भी योजना बनाने का प्रस्ताव है।

यह भी पढ़ें- इंदौर नगर निगम के टैंकर ने बीटेक की छात्रा को रौंदा, मौत, दो पहिया वाहन पर साथ में सवार भाई हुआ घायल

ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट से मेट्रो स्टेशन के आसपास बड़ी-बड़ी इमारतें बन सकेंगी। इससे लोगों को छोटी दूरी के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। मेट्रो स्टेशन तक पैदल या साइकिल से आसानी से पहुंच हो, इसके लिए बेहतर रास्ते और सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। - सुमित गोठी, सचिव, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर इंडिया

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और संतुलन की चुनौती

भोपाल विकास योजना-2047 में मेट्रो के आसपास ऊंची इमारतों और घर-दुकान-दफ्तर को साथ विकसित करने का प्रस्ताव तो अच्छा है, लेकिन भोपाल जैसे टियर-2 शहर में इसे लागू करना बुनियादी ढांचागत रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। व्यावसायिक रूप से सीमित और ऐतिहासिक रूप से जनसंख्या अनुमानों को न छू पाने वाले इस शहर में, कोर क्षेत्रों में अंधाधुंध एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) बढ़ाना इसके प्राकृतिक नालों, जल निकायों और मौजूदा सीवेज-पार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह जाम कर सकता है। - शीतल शर्मा, टाउन प्लानर

स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और ग्रीन-टीडीआर को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो यह योजना बाहरी अनधिकृत क्षैतिज फैलाव को रोकने में विफल रहेगी और केंद्रीय व्यापार क्षेत्रों को अत्यधिक भीड़भाड़ और कंक्रीट के जंगल में बदल देगी, जिससे भोपाल की वास्तविक पहचान ब्लू-ग्रीन नेटवर्क और शांत रिहायशी माहौल को भारी नुकसान पहुंचेगा। - शीतल शर्मा, टाउन प्लानर