
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सरकार ने भोपाल में पश्चिमी बाइपास की पुनरीक्षित लागत को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी की सलाहकार के पद पर नियुक्ति और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई है।
भोपाल में पश्चिमी बाइपास के निर्माण से जबलपुर से होकर इंदौर जाने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें 21 किलोमीटर का फेरा कम लगाना होगा। पहले इस मार्ग की कुल लंबाई 41 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन पुनरीक्षित योजना के तहत अब यह दूरी घटकर 35 किलोमीटर रह जाएगी। वन्य जीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रातापानी वन क्षेत्र में अंडरपास बनाए जाएंगे।
प्रशासनिक कसावट और समन्वय के उद्देश्य से कैबिनेट ने सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी के. साईं मनोहर को सलाहकार नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है। इस नई जिम्मेदारी के तहत उनका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहेगा।

तकनीकी शिक्षा के विस्तार और विकेंद्रीकरण के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को अब तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। इसके तहत विश्वविद्यालय के तीन अलग-अलग मुख्यालय भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में बनाए जाएंगे। इसके अलावा, कैबिनेट ने इन तीनों विश्वविद्यालयों की शिक्षा प्रणाली के साथ कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को भी अनिवार्य रूप से जोड़ने की अनुमति प्रदान कर दी है।