
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कई वर्षों से प्रतीक्षित अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक (फायर सेफ्टी) 2026 विधानसभा से मंगलवार को पारित हो गया। विधेयक के पक्ष में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में कहा कि सभी राज्यों और केंद्र के एक्ट का अध्ययन कर इसे तैयार किया गया है। यह किसी राज्य का सबसे अच्छा एक्ट है।
प्रदेश में इतने फायर स्टेशन और फायर ब्रिगेड होंगी कि शहरी क्षेत्र में 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट में दमकल पहुंच जाएंगी। 15 मीटर से ऊंची हर बिल्डिंग के लिए एनओसी जरूरी होगी। इस एक्ट के माध्यम से आग बुझाने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि घटनाओं को रोकने पर बहुत अधिक ध्यान रहेगा।
इसके अतिरिक्त राजमार्ग संशोधन, मप्र कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता और यूसीसी सहित आठ विधेयक साढ़े पांच घंटे की चर्चा के बाद विधानसभा से पारित हो गए। हर विधेयक पर चर्चा में विपक्ष के दो से तीन सदस्यों ने अपनी बात रखी।
फायर सेफ्टी एक्ट के बारे में मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि अग्निशमन सेवाओं को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में लाया जाएगा। फायर सेफ्टी का संचालनालय और प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनेगा। कहीं भी आग लगने की घटना होती है और जांच में पता चलता है कि फायर सेफ्टी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी अब तय की जाएगी। भवन के मालिक को भी जवाबदेह माना जाएगा।
हर वर्ष फायर ऑडिट कराना होगा। पोर्टल के माध्यम से एनओसी व अन्य कार्यों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाएगी। कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने विधेयक पर चर्चा में कहा कि कानून केवल अधिकार नहीं जवाबदेही भी देता है। सिर्फ कानून नहीं, पर्याप्त फायर स्टेशन, उपकरण, उन्नत प्रशिक्षण की सुविधा होनी चाहिए।
जबलपुर (उत्तर) से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने एक्ट के समर्थन में कहा कि अब पंडालों के लिए भी फायर सेफ्टी की अनुमति आवश्यक होगी। स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं का भी प्रविधान किया गया है। आग की झूठी जानकारी देने वालों के विरुद्ध अर्थदंड का प्रविधान है। स्कूलों के लिए भी एनओसी के मापदंड तय किए गए हैं।
विधानसभा में मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक 2026 पारित हो गया। चर्चा का उत्तर देते हुए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि इसके प्रभावी होने से राजमार्गों के निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं पड़ेगी। 1851 में अंग्रेजों के समय में टोल कानून बने थे जो अब सामयिक नहीं हैं। महाराष्ट्र मॉडल पर राशि जुटाने के लिए इसमें प्रविधान किए गए हैं। बड़ी परियोजनाओं को ध्यान में रखकर यह संशोधन लाया गया है। निर्माण कार्यों के लिए फंडिंग और बजट की आवश्यकता पड़ेगी। हमारा कोई अपना अधिनियम नहीं होगा तो दिक्कत आएगी।
बता दें कि इस अधिनियम में सरकार कुछ सड़कों को राज्य राजमार्ग घोषित कर सकेगी। उनके विकास एवं रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति के साथ सरकार समझौता कर सकेगी।
प्रदेश में उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए इज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक विधानसभा में पारित किया गया। इसके अंतर्गत इज ऑफ डूइंग बिजनेस सचिवालय की स्थापना, सक्षम अधिकारियों की पदस्थापना की जाएगी। उद्योग लगाने के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने में तीन वर्ष और संचालन प्रारंभ होने के बाद अतिरिक्त दो वर्ष तक निरीक्षण से छूट रहेगी। स्व-घोषणा के आधार पर उद्योग स्थापना एवं निर्माण गतिविधियां प्रारंभ करने की अनुमति होगी।
आवेदन लंबित रहने पर स्वतः उच्च अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की जाएगी। औद्योगिक भूमि के हस्तांतरण, पुनः आवंटन एवं उप-पट्टा के लिए इंटीमेशन आधारित व्यवस्था की जाएगी। लीजहोल्ड औद्योगिक भूमि को भूमिस्वामी अधिकार (फ्रीहोल्ड) में परिवर्तित करने का प्रविधान किया जाएगा।
मप्र कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता विधेयक 2026 भी विधानसभा से पारित हो गया है। चर्चा के उत्तर में श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि अब 24 घंटे और सातों दिन दुकानें खुली रह सकती हैं, लेकिन हर आठ घंटे में शिफ्ट बदलनी पड़ेगी। श्रमिक एक सप्ताह में 48 घंटे ही काम कर सकता है, पर एक दिन में 12 घंटे से अधिक काम नहीं कर पाएगा।