
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में करीब 20 हजार नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था में एक बार फिर बदलाव किया गया है। कर्मचारी संगठन का आरोप है कि आईटी सेल ने बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मौखिक निर्देशों के जरिए अब केवल फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन सुविधा वाले मोबाइल से ही उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू कर दी है। ऐसे मोबाइल नहीं होने पर हाजिरी ऐप नहीं खुलेगा, जिससे कर्मचारियों को वेतन कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
मप्र बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने कहा कि एक वर्ष पहले नौ और दस वर्जन वाले मोबाइल को अमान्य कर केवल 11 वर्जन वाले मोबाइल से हाजिरी की व्यवस्था की गई थी। अब फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन की नई अनिवार्यता लागू कर दी गई है, जिससे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों पर नया मोबाइल खरीदने का आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
भार्गव का कहना है कि बिजली कंपनी ने पूर्व में करीब 65 लाख रुपये खर्च कर सैकड़ों बायोमैट्रिक थंब और आईरिस डिवाइस खरीदे थे, जिन्हें मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों, सर्किल, डिवीजन, जोन, वितरण केंद्रों और 33/11 केवी सब-स्टेशनो पर स्थापित किया गया था। उनका दावा है कि ये मशीनें अभी भी उपयोग योग्य हैं, लेकिन वर्तमान में इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
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संगठन ने मांग की है कि कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पहले से उपलब्ध बायोमैट्रिक मशीनों को दोबारा चालू किया जाए। भार्गव ने कहा कि यदि कंपनी इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती है तो कर्मचारी आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।