
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में 2019 से कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए चिकित्सा बीमा योजना लागू करने का प्रस्ताव चल रहा है, लेकिन आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया। जबकि, कर्मचारी संगठनों को योजना बताकर सुझाव भी लिए जा चुके हैं। अंशदायी पेंशन योजना होने से सरकार पर कोई भार भी नहीं आना है।
बीमा का प्रीमियम कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों की पेंशन से कटेगा। जो भी दावा होगा, उसका भुगतान कंपनी करेगी। मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि बस अब योजना लागू कर दी जाए। योजना का मॉडल जो भी रहे, कर्मचारी तैयार हैं।
मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर योजना को लागू करने में परेशानी कहां आ रही है। समूह बीमा योजना का क्षेत्र इतना विकसित हो चुका है कि इसमें अब अधिक सोच विचार की जरूरत नहीं रह गई है। भारत सरकार में ऐसी योजना सफलतापूर्वक चल रही है। प्रदेश सरकार में ही पुलिस कर्मियों के लिए चिकित्सा बीमा योजना वर्ष 2013 से चल रही है, जिसमें केवल 60 रुपये मासिक प्रीमियम पर पांच लाख रुपये तक का चिकित्सा बीमा कवर दिया गया है।
इस योजना में निजी बीमा कंपनियों की तुलना में बहुत कम प्रीमियम लिया जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुलिस विभाग ने किसी कंपनी को ठेका देने के बजाय एक विभागीय समिति बनाकर उसके द्वारा योजना का संचालन किया जा रहा है। इससे कंपनी को मिलने वाला मुनाफा भी बच रहा है, जिससे प्रीमियम बहुत कम हो गया है।
सरकार चाहे तो पुलिस कर्मियों के मॉडल पर भी योजना सभी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए लागू कर सकती है। 10 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनरों से इतना प्रीमियम आएगा कि कुछ वर्षों बाद शासन को आय होने लगेगी। बस निगरानी इस बात की रखनी होगी कि अस्पतालों की मिलीभगत से फर्जी दावे या बढ़ा-चढ़ाकर दावे न आने लगें।
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