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एमपी के 1 लाख लोगों के प्रमोशन का जश्न... सौगात को उत्सव की तरह प्रचारित करेगी सरकार

प्रदेश में दस साल से रुकी पदोन्नतियां एक जुलाई से प्रारंभ हो गईं। मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नतियां दी जा रही हैं। इस पर र...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 11:07:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 11:07:24 PM (IST)
एमपी के 1 लाख लोगों के प्रमोशन का जश्न... सौगात को उत्सव की तरह प्रचारित करेगी सरकार
एमपी के 1 लाख लोगों के प्रमोशन का जश्न

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में 10 साल से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू हुई
  2. हाईकोर्ट से रोक लगाने की याचिका खारिज, 20 हजार से अधिक प्रमोट
  3. पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों में बैठकों का दौर जारी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में दस साल से रुकी पदोन्नतियां एक जुलाई से प्रारंभ हो गईं। मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नतियां दी जा रही हैं। इस पर रोक लगाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका भी लगाई गई मगर न्यायालय ने इसे मान्य नहीं किया। सभी विभागों में एक लाख से अधिक पदोन्नतियां होनी हैं। इससे कर्मचारी प्रसन्न हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिनंदन कर चुके हैं। कर्मचारी हित के इस बड़े कदम को बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जाएगा। इसके लिए राज्य से लेकर जिला स्तर पर कर्मचारी सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी है। विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार की ओर से इसे लेकर वक्तव्य दिया जा सकता है।

पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित सभी विभागों में डीपीसी की बैठकें जारी

अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति जल्द से जल्द करने के निर्देश पर सभी विभागों में इन दिनों विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें चल रही हैं। पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की पदोन्नतियों की प्रक्रिया जिस दिन पूरी हो जाएगी, तब लाभान्वित होने वाले कर्मचारियों की संख्या एक लाख के पार होगी। पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे ने 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को काफी परेशान किया था। राजनीतिक तौर पर इसका नुकसान भी भाजपा को हुआ। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पदोन्नति का रास्ता निकालने के प्रयास भी खूब किए मगर सहमति नहीं बनी।


हाईकोर्ट से स्थगन न होने पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

इसी बीच नए पदोन्नति नियम बनाए, जिन्हें भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। चूंकि, न्यायालय से कोई स्थगन नहीं था इसलिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय लिया। एक जुलाई से प्रक्रिया प्रारंभ हुई और अब तक लगभग बीस हजार से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नत किया जा चुका है। यह प्रक्रिया चल रही है। पदोन्नति की इस प्रक्रिया से सभी वर्ग के कर्मचारी उत्साहित हैं। मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया जा चुका है। अब कर्मचारी संगठन राज्य और जिला स्तर पर सम्मेलन करने की तैयारी कर रहे हैं। उधर, सरकार भी इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करेगी। विधानसभा में इसे लेकर वक्तव्य भी दिया जा सकता है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक: दस्तावेज की बारीकी से जांच कर लें

मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण यंत्री से लेकर मुख्य अभियंता के पदों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक गुरुवार को हुई। पदोन्नति के लिए मुख्य अभियंता के 23 पद हैं और अधिकारी 21 हैं। इनमें से भी चार-पांच की विभागीय जांच चल रही है। बैठक में दस्तावेजों की बारीकी से जांच करके दोबारा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने भी विभिन्न पदों पर पदोन्नति के लिए बैठक की।

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