MP पर कर्ज का 'पहाड़'... एक साल में 21 बार लिया उधार, अब 5.28 लाख करोड़ के बोझ तले दबी सरकार
मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 बार कर्ज लिया। मार्च में ही चार बार में कुल 18,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। कुल मिलाकर प्रदेश ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 30 Mar 2026 07:58:28 PM (IST)Updated Date: Mon, 30 Mar 2026 08:01:47 PM (IST)
MP पर कर्ज का 'पहाड़'... एक साल में 21 बार लिया उधार, AI Generated ImageHighLights
- मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज बढ़कर अब 5.28 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने रिकॉर्ड 21 बार बाजार से लिया कर्ज
- सालाना 37 हजार करोड़ रुपये केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुका रही है सरकार
सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 बार कर्ज लिया। मार्च में ही चार बार में कुल 18,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। इस वर्ष 91 हजार 500 करोड़ के कर्ज को मिलाकर प्रदेश पर 5.28 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है। हालांकि सरकार ने नए कर्ज को लेने के लिए अपनी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ बताई है। सरकार ने दावा किया कि आर्थिक गतिविधियों और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए कर्ज लिया जा रहा है। यह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में निर्धारित सीमा के भीतर है।
आय से कहीं ज्यादा हुआ बजट का आकार
लेकिन इससे राज्य सरकार लगातार कर्ज के बोझ तले दबती जा रही है। नीति आयोग की हाल ही में जारी दूसरी वार्षिक फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में भी मप्र सरकार पर बढ़ते कर्ज और ब्याज पर चिंता व्यक्त की गई है। बता दें कि वर्ष 2024-25 में 12 बार कर्ज लिया गया था। वर्तमान में राज्य का कर्ज कुल बजट से ज्यादा हो गया है। विभिन्न करों से राज्य की आय 1.77 लाख करोड़ है, जबकि बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये है।
दिग्विजय सरकार के कुल कर्ज से डेढ़ गुना तो केवल ब्याज भर रही सरकार
वर्ष 2003 में तत्कालीन दिग्विजय सरकार पर 23 हजार करोड़ का कर्ज था, 23 साल में यह कर्ज बढ़कर 5.28 लाख करोड़ रुपये हो गया है। राज्य सरकार 23 हजार करोड़ से डेढ़ गुना अधिक अनुमानित 37 हजार करोड़ रुपये कर्ज पर केवल ब्याज चुका रही है। कर्ज का बोझ मध्य प्रदेश की आर्थिक सेहत बिगाड़ रहा है। कैग ने भी कर्ज से बचने की सलाह दी है लेकिन रेवड़ी योजनाएं और विकास में संतुलन बनाए रखने के लिए कर्ज के अलावा कोई उपाय नहीं है। वैसे तो यह कर्ज सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत की सीमा के भीतर लिया जा रहा है पर कर्ज का बोझ तो बढ़ ही रहा है।
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