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लोकायुक्त-EOW के पास साढ़े छह साल में 50 हजार से ज्यादा शिकायतें, महज 486 मामले पहुंचे कोर्ट

मध्य प्रदेश की दो प्रमुख भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों - लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के पास बीते साढ़े छह वर्षों में कुल 50,453 शिकाय...और पढ़ें

By Brijendra RishishwarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 07:10:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 07:10:42 PM (IST)
लोकायुक्त-EOW के पास साढ़े छह साल में 50 हजार से ज्यादा शिकायतें, महज 486 मामले पहुंचे कोर्ट
लोकायुक्त-EOW के पास साढ़े छह साल में 50 हजार से ज्यादा शिकायतें

HighLights

  1. लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में साढ़े छह साल में आईं 50,453 शिकायतें
  2. जांच की सुस्त रफ्तार: 50 हजार में से सिर्फ 486 मामले पहुंचे कोर्ट
  3. विधानसभा में सरकार ने दिया जवाब, भ्रष्टाचार जांच पर उठे सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश की दो प्रमुख भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों - लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के पास बीते साढ़े छह वर्षों में कुल 50,453 शिकायतें व आवेदन पहुंचे, लेकिन इनमें से सिर्फ 486 मामले ही कोर्ट तक पहुंच सके। यह जानकारी हाल ही के सत्र में विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की सुस्त रफ्तार उजागर हुई है। यह हाल तब है जब इन दोनों जांच एजेंसियों में सालों से इन्हीं जांच एजेंसियों में सेवा देने वाले पुलिस अधीक्षक इन शिकायतों की निगरानी कर रहे हैं।

लोकायुक्त: 27,192 शिकायतें, 1,451 एफआईआर

वर्ष 2020 से 2025 के बीच लोकायुक्त को 27,192 शिकायतें मिलीं। इनमें से 2,475 मामलों में गहन जांच दर्ज की गई, जिसके बाद विशेष पुलिस स्थापना ने 1,451 एफआईआर दर्ज कीं और 477 मामलों में अदालत में चालान पेश किया। इस अवधि में विशेष न्यायालयों ने केवल 84 मामलों में अंतिम फैसला सुनाया, जिनमें से 55 में दोषसिद्धि हुई, 26 आरोपित बरी हुए और 3 मामले अभियुक्तों की मृत्यु के कारण समाप्त हो गए। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल पर यह जानकारी विधानसभा में लिखित रूप से दी गई।


ईओडब्ल्यू: 23,261 आवेदन, सिर्फ नौ चालान

दूसरी ओर, 2020 से जून 2026 के बीच ईओडब्ल्यू के पास 23,261 आवेदन पहुंचे, लेकिन इनमें से केवल 3,018 मामलों को ही विस्तृत जांच योग्य मानते हुए शिकायत के रूप में दर्ज किया गया। 756 आवेदन जांच के बाद बंद कर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में मामले अलग-अलग स्तर पर लंबित हैं।

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों के बावजूद अदालत में सिर्फ 9 मामलों में ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा सका। यह जानकारी कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग ने विधानसभा में दी।

कैसे चलती है जांच की प्रक्रिया?

लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू, दोनों में काम कर चुके रिटायर्ड डीएसपी आरके सिंह ने बताया कि किसी भी शिकायत के मिलने के बाद संबंधित जिले के एसपी कार्यालय से उसे मुख्यालय भेजा जाता है। इसके बाद लोकायुक्त में विधिक सलाहकार समेत वरिष्ठ अधिकारी उस शिकायत की समीक्षा करते हैं। जो मामले विभागीय जांच के लायक पाए जाते हैं, उन्हें संबंधित विभाग के प्रमुख के पास जांच के लिए भेज दिया जाता है, और विभाग की ओर से इसकी सूचना वापस दी जाती है। सिंह के मुताबिक यही बहुस्तरीय प्रक्रिया मामलों के निपटारे में लगने वाले लंबे समय की एक बड़ी वजह है।

पुलिस अधीक्षकों के पास दोनों एजेंसियों में काम करने का अनुभव

प्रदेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के कप्तान को दोनों एजेंसियों में काम करने का अच्छा अनुभव है। जबलपुर ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा लोकायुक्त में भी एसपी रह चुके हैं। एसपी सुनील पाटीदार ईओडब्ल्यू में एआईजी रह चुके हैं और फिलहाल लोकायुक्त भोपाल के पुलिस अधीक्षक हैं।

इसी तरह से इंदौर के ईओडब्ल्यू के अधीक्षक रामेश्वर यादव लोकायुक्त ग्वालियर में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। भोपाल के ईओडब्ल्यू के एसपी अरुण मिश्रा भी लोकायुक्त में अधीक्षक रह चुके हैं। इसके अलावा ग्वालियर ईओडब्ल्यू के दिलीप तोमर और लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा गृह जिले वाली एजेंसियों में पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं।

फैक्ट फाइल - दोनों को मिलाकर तस्वीर

बिंदु लोकायुक्त ईओडब्ल्यू कुल
शिकायतें 27,192 23,261 50,453
जांच हेतु दर्ज 2,475 3,018 5,493
एफआईआर 1,451 (अलग से उल्लेख नहीं) 1,451
कोर्ट में चालान 477 9 486

(स्रोत- जुलाई 2026 के सत्र में विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी)

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