MP में विकास का नया मॉडल, CM मोहन यादव ने दिया Skill और Innovation का मंत्र
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने समृद्ध मध्य प्रदेश-2047 के लिए कौशल, शोध, नवाचार और उद्यमिता पर जोर दिया। केंद्रीय संस्थानों से 13 एमओयू हुए और युवाओं को...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 25 Aug 2026 10:19:57 AM (IST)Updated Date: Tue, 25 Aug 2026 10:19:57 AM (IST)
CM मोहन यादव ने दिया Skill और Innovation का मंत्रHighLights
- कौशल को नई करेंसी, नवाचार को नई अर्थव्यवस्था बताया गया
- केंद्रीय संस्थानों का ज्ञान समाज तक पहुंचाने पर जोर
- एआई चुनौतियों से निपटने मानव पूंजी विकसित होगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल : मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि आज स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनामी। हमारी संस्थाओं को कौशल, शोध, नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बनना होगा। पब्लिकेशन से लेकर पेटेंट तक, पेटेंट से प्रोटोटाइप तक और प्रोटोटाइप से लेकर एंटरप्राइज की इकोनामिक और नालेज वैल्यू चैन की स्थापना करनी होगी।
मध्य प्रदेश में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन, भूमि, युवा शक्ति और संस्थागत क्षमता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं के कौशल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए।यह बात मुख्यमंत्री ने कंट्रीब्यूशन आफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीटयूशन्स फार समृद्ध मध्य प्रदेश-2047 पर राज्य स्तरीय कान्क्लेव को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्जलित कर कान्क्लेव का शुभारंभ किया।
राज्यों के बीच परस्पर सहयोग भी आवश्यक
- मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ परस्पर सहयोग भी आवश्यक है। प्रत्येक राज्य आगे बढ़ेगा, तभी भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। जिस प्रकार रामायण में जामवंत ने समुद्र लांघने के लिए हनुमान जी को उनकी शक्ति से परिचित कराया था, उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को उसके सामर्थ्य से परिचित कराया है।
- मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्मारिका-समृद्ध मध्य प्रदेश-2047 केंद्रीय संस्थाओं का सम्मेलन विमोचन किया। कान्क्लेव अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा आयोजित किया गया। “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रामिस” की थीम पर आयोजित कान्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में स्थित केंद्रीय संस्थाओं की समृद्ध मप्र-2047 के लक्ष्य प्राप्ति में भागीदारी और सहभागिता सुनिश्चित करना है।
संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे
- मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर एकत्र होना मध्य प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और तकनीक का लाभ प्रयोगशालाओं और परिसरों तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। “एक संस्थान–एक संकल्प” केवल एक विचार नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य के निर्माण की कार्ययोजना है।
- मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मप्र विकास के नित नए सोपान अर्जित करेगा। इस क्रम में नालेज डिपाजेटरी पोर्ट्ल आरंभ किया जाएगा, जिस पर संस्थाएं अपने विचार साझा कर सकेगी।
एआइ की चुनौतियों से निपटने हमें ह्यूमन कैपिटल को विकसित करना होगा
- मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) एक फैशन बन गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक मेजर डिस्ट्रक्टर होने जा रहा है। क्या होगा अधिकांश लोग स्पष्ट करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन इस सब के बीच में प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है- ह्यूमन कैपिटल।
- हमें ह्यूमन कैपिटल को कैसे विकसित करना है, जिससे हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सारी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मानव पूंजी विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि समृद्ध मध्य प्रदेश-2047 विजन डाक्यूमेंट विकसित भारत का एक लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सप्त संकल्प बताए हैं। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर बहुत अधिक फोकस है, हमें हमारे युवाओं को एआई की चुनौती का सामना करने के उद्देश्य से कौशल सम्पन्न बनाना होगा।
कान्क्लेव में हुए 13 एमओयू
- कान्क्लेव में प्रदेश में शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ 13 एमओयू किए गए। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) इंदौर, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआइपीई) ग्वालियर, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइआइएसईआर) भोपाल, आइसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआइटीटीटीआर) भोपाल।
- राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआइडी) भोपाल, अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (एबीवी-आइआइआइटीएम) ग्वालियर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) भोपाल, सीएसआइआर-उन्नत सामग्री एवं प्रक्रिया अनुसंधान संस्थान (एएमपीआरआइ) भोपाल, स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) भोपाल।
- राष्ट्रीय फारेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) भोपाल तथा प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंदौर शामिल हैं। इसके साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल और डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के बीच भी एमओयू हुआ।