डिजीटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ सकता है। राज्य की पुलिस कमान पहली बार किसी महिला अधिकारी के हाथों में आ सकती है। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं, जिसके बाद नए पुलिस मुखिया की नियुक्ति की जानी है।
इसके लिए राज्य सरकार ने 12 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक, नवंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली में यूपीएससी की उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें नए डीजीपी के नाम पर मुहर लगने की संभावना है।
दौड़ में सबसे आगे हैं ये तीन नाम
यूपीएससी की बैठक में तीन वरिष्ठ अफसरों का फाइनल पैनल तय किया जाएगा। इस रेस में तीन नाम सबसे मजबूत माने जा रहे हैं:
1. प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (डीजी, होमगार्ड): यदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनके नाम पर मुहर लगाते हैं, तो वह मध्य प्रदेश की पहली महिला डीजीपी बनकर इतिहास रच देंगी। उनका सामान्य रिटायरमेंट फरवरी 2028 में है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के नियम के तहत डीजीपी पद पर चयन होने पर वह नवंबर 2029 तक इस पद पर बनी रह सकेंगी। उनके संभावित कार्यकाल के दौरान उज्जैन सिंहस्थ, विधानसभा और लोकसभा चुनाव जैसे बड़े आयोजन पड़ेंगे।
2. वरुण कपूर (डीजी, जेल): यह वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं। इनका सामान्य रिटायरमेंट मई 2027 में है, लेकिन डीजीपी बनने पर इनका कार्यकाल नवंबर 2028 तक रहेगा। इनके कार्यकाल में भी उज्जैन सिंहस्थ और राज्य का अगला विधानसभा चुनाव संपन्न होगा।
3. उपेंद्र जैन (डीजी, ईओडब्ल्यू): आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) का लंबा और पुख्ता प्रशासनिक अनुभव इनके पक्ष में जाता है। इनका रिटायरमेंट अगस्त 2027 में है, लेकिन डीजीपी पद पर चुने जाने पर इनका कार्यकाल नवंबर 2029 तक चलेगा। इनके कार्यकाल में भी उज्जैन सिंहस्थ, विधानसभा और लोकसभा दोनों बड़े चुनाव कवर होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की दो नई और अहम शर्तें
नए डीजीपी के चयन के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत कुछ कड़े मापदंड तय किए गए हैं:
6 महीने की सर्विस बाकी: यूपीएससी पैनल में केवल उन्हीं अफसरों के नाम शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी सामान्य सेवानिवृत्ति में कम से कम 6 महीने की सेवा शेष हो।
10 साल की कोर पुलिसिंग: सुप्रीम कोर्ट के 12 फरवरी 2026 के ताजा स्पष्टीकरण के अनुसार, दावेदार अफसर के पास कानून-व्यवस्था (लॉ एंड आर्डर), क्राइम ब्रांच/सीआईडी, ईओडब्ल्यू, इंटेलिजेंस, विजिलेंस या केंद्रीय जांच एजेंसियों में कुल मिलाकर कम से कम 10 साल का सक्रिय पुलिसिंग अनुभव होना अनिवार्य किया गया है।
नार्वे के पहले हफ्ते में दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद यह स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी कि मध्य प्रदेश की कमान किसे सौंपी जाती है।