MP पुलिस की नई पहल, महिला अपराध से जुड़े मामलों के निपटारे के आधार पर सभी जिलों की ग्रेडिंग कर रहा पीएचक्यू
मध्य प्रदेश में सभी जिलों की प्रतिमाह ग्रेडिंग पुलिस मुख्यालय ने शुरू की है। ग्रेडिंग संबंधित जिलों को भेजी जा रही है, जिससे वे अपेक्षित सुधार कर सकें ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 07:27:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2026 07:27:04 PM (IST)
एमपी पुलिस मुख्यालय ने शुरू की जिलों की रैंकिंग।HighLights
- एमपी पुलिस मुख्यालय ने शुरू की जिलों की रैंकिंग
- गुम बालिकाओं की तलाश और 60 दिन में चालान
- खराब प्रदर्शन वाले कप्तानों की बढ़ेगी मुश्किल
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। गुम बालिकाओं को खोजने का काम हो या 60 दिन में न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने का...इस तरह के तीन कार्यों के आधार पर सभी जिलों की प्रतिमाह ग्रेडिंग पुलिस मुख्यालय ने शुरू की है। ग्रेडिंग संबंधित जिलों को भेजी जा रही है, जिससे वे अपेक्षित सुधार कर सकें। ग्रेडिंग के लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। सबसे अच्छी स्थिति वाले जिले को हरे रंग और खराब वाले को लाल रंग में दिखाया जाता है। खराब स्थिति वाले जिलों के पुलिस अधिकारियों से सुधार के लिए बातचीत भी की जा रही है।
निगरानी और ग्रेडिंग के सकारात्मक परिणाम
इसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले हैं। मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की ग्रेडिंग और निगरानी से गुम बालिकाओं को खोजने के काम में तेजी आई है। जिलों के बीच अच्छी प्रतिस्पर्धा बनी है। अभी तीन आधार पर ग्रेडिंग की जाती है। बाद में कुछ और अपराधों को शामिल करने पर विचार किया जाएगा। ग्रेडिंग में तीनों कार्यों के लिए अलग-अलग मापदंड निर्धारित किए गए हैं।
गुम बालिकाओं की खोज और बीएनएस के नियमों पर फोकस
गुम बालिकाओं को खोजने के मामले में बड़ी चुनौती रहती है। कई बार सरकार ऐसे मामलों में विपक्ष के निशाने पर रहती है। ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पांच वर्ष से अधिक समय से गुम लड़कियों को खोजने वाले जिलों को ग्रेडिंग में 20 प्रतिशत अधिक अंक दिए जा रहे हैं। इसी तरह से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अनुसार एफआइआर के 60 दिन के भीतर चालान प्रस्तुत हो रहा है या नहीं, इसकी भी निगरानी की जाती है।
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पीड़िताओं के भरण-पोषण और वारंट तामीली की पड़ताल
ग्रेडिंग में तीसरा कार्य यह है कि न्यायालय द्वारा जिन पीड़िताओं को भरण-पोषण देने के आदेश दिए गए हैं, उसमें यह देखना कि उन्हें मिल पा रहा है या नहीं। ऐसे हर एक मामले की पड़ताल की जाती है। भोपाल में ही एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें भरण-पोषण के आदेश के चार वर्ष बाद वारंट की तामीली ही नहीं हो पा रही थी, जिसे हल कराया गया है।
गुम बालिकाओं को खोजने सहित तीन तरह के मामलों में क्रियान्वयन को लेकर ग्रेडिंग की जा रही है। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं।- अनिल कुमार, विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा)