
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए ‘जीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ प्रोग्राम का विस्तार किया जाएगा। धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन में संचालित यह कार्यक्रम अब भोपाल, इंदौर और उज्जैन जिले में भी लागू होगा। इसके तहत दुर्घटना संभावित स्थानों और हादसों के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे एक ही स्थान या एक ही कारण से होने वाली दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
यह निर्णय सोमवार को मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में प्रदेश में सड़क सुरक्षा की स्थिति, दुर्घटनाओं के आंकड़ों और हादसों को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कमेटी के निर्देशों, सरकार द्वारा किए गए सड़क सुरक्षा संबंधी निर्णयों और प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी दी। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
न्यायमूर्ति सप्रे ने निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मृत्यु की संख्या में प्रभावी कमी लाई जाए। इसके लिए फोर ई- इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, एनफोर्समेंट और एजुकेशन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान करने के निर्देश दिए।
बैठक में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़ों और सुरक्षा उपायों का प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें ब्लैक स्पॉट, हिट एंड रन, राहवीर योजना सहित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे अन्य प्रयासों की जानकारी दी गई।
कमेटी ने प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का व्यवस्थित विश्लेषण करने पर जोर दिया। दुर्घटना का स्थान, कारण और परिस्थितियां सामने आने के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए सुधारात्मक उपाय किए जाएं। दुर्घटना वाले स्थलों पर आवश्यक इंजीनियरिंग सुधार के साथ यातायात नियंत्रण और जन-जागरूकता के उपायों को भी जोड़ा जाएगा।
सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने का सुझाव भी दिया गया। इन समितियों के माध्यम से समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहन राशि देने पर भी विचार किया गया। पशुओं के कारण होने वाले हादसों की रोकथाम के लिए लघु और दीर्घकालीन योजनाएं बनाकर उन्हें निर्धारित समय-सीमा में लागू करने के निर्देश दिए गए।
गैर-बीमित वाहनों की संख्या कम करने के लिए प्रदेश के एक जिले में ‘बीमा नहीं तो ईंधन नहीं’ व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके लिए सबसे अधिक गैर-बीमित वाहनों वाले जिले का चयन होगा। पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे और उन्हें वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इससे गैर-बीमित वाहनों की पहचान कर उन्हें ईंधन देने पर रोक लगाने की व्यवस्था पायलट स्तर पर लागू की जाएगी।
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से औसतन हर वर्ष करीब 13 हजार लोगों की मृत्यु होती है। हालांकि, 2026 के पहले छह महीनों में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में करीब 800 की कमी आई है। बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में औसतन 16 मिनट का समय लगता है। इसे और कम करने तथा दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
समिति के अध्यक्ष ने बायपास स्थित भोपाल ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने एक वाहन की पूरी फिटनेस प्रक्रिया देखी। फिटनेस तकनीशियन ने वाहन के पास होने की जानकारी दी, लेकिन सिस्टम पर रिपोर्ट देखने पर वही वाहन हेडलाइट और हॉर्न की कमी के कारण फेल दिखा। इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब तक पूरी रिपोर्ट सिस्टम में अपडेट न हो जाए, तब तक वाहन के पास होने का निर्णय नहीं आना चाहिए। फिटनेस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाए और किसी भी स्थिति में निर्धारित जांच पूरी किए बिना अनफिट वाहन को फिट घोषित न किया जाए।