
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षक चयन परीक्षा में विशेष शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए होने वाली भर्ती में बोनस अंक पाने के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विशेष शिक्षा में डिप्लोमा होने का दावा कर दिया। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने ऐसे अभ्यर्थियों से प्रमाणपत्र मांगे हैं।
हाई कोर्ट के निर्देश पर खुला पोर्टल
ईएसबी ने प्रमाणपत्र अपलोड करने के लिए पोर्टल खोल दिया है। जिन अभ्यर्थियों ने विशेष शिक्षा में डिप्लोमा होने का दावा किया है, उन्हें आठ जुलाई तक प्रमाणपत्र अपलोड करना होगा। निर्धारित समय तक प्रमाणपत्र जमा नहीं करने वालों का दावा निरस्त कर दिया जाएगा।
प्रदेश में डिप्लोमाधारियों से ज्यादा अभ्यर्थी मेरिट में
कर्मचारी चयन मंडल द्वारा अक्टूबर 2025 में आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा में विशेष शिक्षकों के 3200 पद थे, जिनमें करीब पांच हजार अभ्यर्थी सफल हुए। मेरिट सूची जारी होने पर इसमें विशेष शिक्षा में डिप्लोमा का दावा करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या प्रदेश में उपलब्ध वास्तविक डिप्लोमाधारियों से भी अधिक पाई गई। अनुमान के अनुसार प्रदेश में पिछले 15 से 20 वर्षों में विशेष शिक्षा में डिप्लोमा प्राप्त लोगों की संख्या 1500 से 2500 के बीच है। इनमें से कई पहले से शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
'हां' विकल्प भरकर ले लिए बोनस अंक
अधिकारियों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय डिप्लोमा होने को लेकर केवल 'हां' या 'नहीं' का विकल्प पूछा गया था। डिप्लोमा होने पर पांच बोनस अंक दिए जाने थे। इसी का फायदा उठाते हुए कई अभ्यर्थियों ने बिना प्रमाणपत्र 'हां' का विकल्प भर दिया और बोनस अंक के आधार पर मेरिट सूची में स्थान बना लिया। इस सूची को सोनम अगरिया सहित अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद न्यायालय ने मई में ईएसबी को ऐसे सभी अभ्यर्थियों से प्रमाणपत्र मांगने के निर्देश दिए।
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