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डिजिटल डेस्क। किसी गांव का नाम सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में कोई ऐतिहासिक घटना, महापुरुष या प्राकृतिक सुंदरता का ख्याल आता है। लेकिन मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर कई ऐसे गांव भी बसे हैं, जिनके नाम बेहद अनूठे और रोचक हैं। प्रदेश में ऐसे दर्जनों गांव मौजूद हैं, जिनके नाम रिश्तों के नाते-रिश्तों, रसोई के बर्तनों और खाने-पीने के स्वादिष्ट जायके पर रखे गए हैं। कुछ नाम ऐसे, जो कहने में ग्रमीणों को शर्म आती है।
प्रदेश के नक्शे पर नज़र डालें तो यहां रिश्तों के नाम से मिलते-जुलते गांव बहुतायत में मिल जाएंगे। उदाहरण के तौर पर बैतूल जिले में 'साला' और 'साली' नाम के दो अलग-अलग गांव मौजूद हैं। वहीं धार जिले में 'देवर' गांव बसा है, जबकि विदिशा जिले में 'मौसीपुरा' और 'बालमपुर' जैसे अनूठे नाम वाले गांव स्थित हैं। पहली बार इन गांवों का नाम सुनने वाला कोई भी व्यक्ति अचरज में पड़ जाता है।
केवल रिश्ते ही नहीं, बल्कि रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के नाम पर भी एमपी में कई बस्तियां आबाद हैं। शाजापुर जिले में 'कढ़ाई' गांव है, तो देवास जिले में 'कटोरी' और 'टोकरा' नाम के गांव स्थित हैं। वहीं छतरपुर जिले में 'छुरी' नाम का एक पूरा गांव बसा हुआ है।
स्वाद और खान-पान के शौकीनों के लिए भी एमपी के गांव कम दिलचस्प नहीं हैं। 'चीनी', 'सिंघाड़ा', 'सोडा', 'लहसुना', 'भजिया', 'हल्दी', 'करेला' और 'घुट्टी' ये सभी नाम पहली नजर में किसी बाजार की लिस्ट या खाने का सामान लगते हैं। लेकिन हकीकत में ये मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्थित वास्तविक गांवों के नाम हैं।
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इन गांवों के नामकरण के पीछे सदियों पुरानी लोक कथाएं, पुराने जमींदारों के नाम या वहां की कोई विशेष भौगालिक स्थिति रही है। सालों बीत जाने के बाद भी ये अनोखे नाम आज भी इन गांवों की एक खास पहचान बने हुए हैं और बाहर से आने वाले लोगों के लिए कौतूहल का विषय रहते हैं।
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