भोपाल नगर निगम घोटाला: FIR के बाद अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर हटाए गए, बजट से पहले मुकेश शर्मा को मिली कमान
नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच वित्त और लेखा शाखा के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को शा ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 14 Mar 2026 10:47:53 PM (IST)Updated Date: Sat, 14 Mar 2026 10:47:52 PM (IST)
वित्त शाखा की कमान मुकेश शर्मा के पास। नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच वित्त और लेखा शाखा के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को शाखा से हटा दिया है। वहीं, अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को वित्त एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फेरबदल उस समय हुआ है, जब नगर निगम का बजट पेश होने में करीब 10 दिन शेष हैं। नगर निगम का वार्षिक बजट 23 से 26 मार्च के बीच पेश होना है। बजट का ड्राफ्ट तैयार करने की अंतिम तिथि 16 मार्च तय की गई है।
लोकायुक्त की छापेमारी और FIR का असर
इससे ठीक पहले करोड़ों रुपये के फर्जी बिल भुगतान मामले में निगम के डाटा सेंटर सहित कई शाखाओं में छापेमारी कर लोकायुक्त ने पिछले करीब दस साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किया है। शिकायत के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद शुक्रवार को तत्कालीन वित्त एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी देख रहे अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई थी। इसके बाद निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने उन्हें इस शाखा से हटा दिया गया है। ऐन वक्त पर वित्त विभाग के प्रमुख को हटाए जाने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप है। अब मुकेश शर्मा पर बजट को अंतिम रूप देने और निगम की वित्तीय साख सुधारने की दोहरी चुनौती होगी।
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
एफआइआर के बाद नपे सेवतकर लोकायुक्त पुलिस द्वारा भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद से ही सेवतकर पर गाज गिरना तय माना जा रहा था। लोकायुक्त की जांच में सामने आया है कि साफ्टवेयर की मदद से फर्जी ई-बिल तैयार कर बिना काम कराए ही परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया।
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फर्जी भुगतान का तरीका और जांच का दायरा
आरोप है कि जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशाप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य कार्य दर्शाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि कई मामलों में संबंधित विभागों को इसकी जानकारी तक नहीं थी। इस मामले में जांच आगे बढ़ने पर अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े एसएपी साफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी जब्त कर लिया है।