मुस्लिम एडवोकेट शीराज कुरैशी ने लिखी किताब 'In Support of UCC-MP'; बोले- यह संविधान की मूल भावना के अनुरूप
ग्वालियर हाईकोर्ट के अधिवक्ता शीराज कुरैशी ने In Support of UCC- MP पुस्तक लिखकर समान नागरिक संहिता को संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 44 के अनुरूप ब...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 04:39:28 PM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2026 04:39:28 PM (IST)
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के साथ अधिवक्ता शीराज कुरैशी। नईदुनिया।HighLights
- ग्वालियर हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं शीराज कुरैशी
- यूसीसी के समर्थन में पुस्तक लिखी, संविधान के अनुरुप बताया
- किताब में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राज्य विधानसभा में सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश हो गया। देश भर में इस पर चल रही बहस, समर्थन और विरोध के बीच उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में अधिवक्ता शीराज कुरैशी की पुस्तक 'इन सपोर्ट ऑफ यूसीसी-एमपी' चर्चा में है।
कुरैशी का दावा है कि यह पुस्तक संविधान की मूल भावना "हम भारत के लोग" और अनुच्छेद 44 के आलोक में यूसीसी की आवश्यकता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करती है।
आरएसएस से जुड़े हैं कुरैशी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और भारत फर्स्ट संगठन के पदाधिकारी कुरैशी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2006 से इस विषय पर अध्ययन किया है। देशभर में आयोजित 70 से अधिक बैठकों, वेबिनार और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ संवाद के आधार पर पुस्तक तैयार की गई है।
उनका कहना है कि यह पुस्तक आम पाठकों, विधि के विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी होगी। फिलहाल इसका अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हुआ है, जबकि हिंदी संस्करण शीघ्र आएगा।
भ्रांतियों का दूर करेगी किताब
उन्होंने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 को लागू करने का समय आ गया है। उनके अनुसार, यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान कर संवैधानिक समानता को मजबूत करेगा। इस पुस्तक में मुस्लिम समाज में यूसीसी को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर भी चर्चा की गई है।
यूसीसी पर लिखना बड़ा चुनौती
कुरैशी का कहना है कि यूसीसी इस्लाम के धार्मिक सिद्धांतों से टकराता नहीं, बल्कि न्याय और समानता की अवधारणा को मजबूत करता है। उन्होंने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया है। कुरैशी स्वीकार करते हैं कि एक मुस्लिम होने के नाते यूसीसी के समर्थन में पुस्तक लिखना चुनौतीपूर्ण रहा।
उनका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय का विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक दृष्टिकोण से विषय पर संवाद को आगे बढ़ाना और यूसीसी से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करना है।