भोपाल में 53 वर्षों से सुरक्षित है नीम करोली बाबा का 'दुर्लभ' अस्थि कलश, इस कॉलोनी में पोते ने सहेजकर रखी है आध्यात्मिक धरोहर
आध्यात्मिक जगत के प्रख्यात संत और भक्तों के बीच हनुमानजी के अवतार माने जाने वाले नीव करोली बाबा की स्मृतियां आज भी भोपाल में जीवंत हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 03 Apr 2026 06:51:26 PM (IST)Updated Date: Fri, 03 Apr 2026 07:41:12 PM (IST)
नीम करोली बाबाHighLights
- 53 वर्षों से भोपाल में सुरक्षित अस्थि कलश
- परिवार के पास संरक्षित अद्वितीय धार्मिक धरोहर
- मंदिर में स्थापना की योजना पर काम जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आध्यात्मिक जगत के प्रख्यात संत और भक्तों के बीच हनुमानजी के अवतार माने जाने वाले नीम करोली बाबा की स्मृतियां आज भी भोपाल में जीवंत हैं। बाबा का एक अत्यंत दुर्लभ अस्थि कलश पिछले 53 वर्षों से राजधानी में सुरक्षित रखा गया है।
क्या किया जा रहा है इसको लेकर दावा
दावा किया जा रहा है कि पूरे देश में यह एकमात्र ऐसा अस्थि कलश है जो उनके परिवार के पास सुरक्षित है। नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में अपनी देह त्यागी थी। उनके महाप्रयाण के पश्चात अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया था। लेकिन बाबा के बड़े पुत्र अनेग सिंह एक अस्थि कलश अपने साथ भोपाल ले आए थे। तब से लेकर आज तक यह कलश उनके परिवार द्वारा पूरी शुचिता और श्रद्धा के साथ सहेज कर रखा गया है।
अरेरा कालोनी में दस दिन ठहरे थे बाबा
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया कि बाबा का भोपाल से गहरा नाता था। वर्ष 1970 में वे अरेरा कालोनी स्थित अपने पुत्र के निवास पर करीब दस दिनों तक रुके थे। इस प्रवास के दौरान उन्होंने भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया था और नेवरी मंदिर में रात्रि विश्राम भी किया था। डा. शर्मा के अनुसार, बाबा ने उन्हें स्वयं हनुमानजी की एक विशेष प्रतिमा भेंट की थी, जिसकी परिवार आज भी नियमित पूजा करता है।
मंदिर में स्थापित करने की योजना
डॉ. धनंजय शर्मा ने जानकारी दी कि परिवार अब इस पवित्र अस्थि कलश को जन-साधारण के दर्शनार्थ और आध्यात्मिक लाभ के लिए एक भव्य मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहा है। भोपाल में नीम करोली बाबा का एक मंदिर और आश्रम निर्माण प्रस्तावित है। हालांकि, इस कार्य के लिए अभी उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है। जैसे ही जमीन का आवंटन या चयन होगा, मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कर अस्थि कलश को वहां विधिवत स्थापित किया जाएगा।