ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का आयोजन: 700 युवा बनेंगे 'शंकरदूत', आचार्य शंकर प्रकटोत्सव में मुख्यमंत्री करेंगे विद्वानों का सम्मान
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर प्रकटोत्सव 'एकात्म पर्व' का आयोजन 17 अप्रैल से होने जा रहा है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 13 Apr 2026 07:31:53 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Apr 2026 07:31:53 AM (IST)
ओंकारेश्वर में 'एकात्म पर्व' 17 से 21 तकHighLights
- ओंकारेश्वर में 17 से 21 अप्रैल तक भव्य 'एकात्म पर्व'
- स्वामी सदानंद सरस्वती और स्वामी अवधेशानंद गिरि होंगे शामिल
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अद्वैत पर विशेष विमर्श सभा
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। ओंकारेश्वर स्थित मांधाता पर्वत की पवित्र गोद में आगामी 17 से 21 अप्रैल तक 'आचार्य शंकर प्रकटोत्सव: एकात्म पर्व' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पंच दिवसीय उत्सव में ज्ञान, भक्ति और दर्शन की त्रिवेणी बहेगी।
संत समागम और विमर्श सभा
इस महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती और जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जैसे प्रख्यात संत शिरकत करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र 'अद्वैतामृतम् - विमर्श सभा' होगी। इसमें अद्वैत वेदांत की समकालीन प्रासंगिकता पर विद्वान अपने विचार रखेंगे। विशेष रूप से 17 अप्रैल को 'अद्वैत एवं जेन जी' (Gen Z) और 19 अप्रैल को 'अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता' (AI) जैसे नवाचारी विषयों पर युवा विशेषज्ञों और संतों के बीच सीधा संवाद होगा।
शंकरदूत दीक्षा एवं सम्मान समारोह
उत्सव के अंतिम दिन, 21 अप्रैल (वैशाख शुक्ल पंचमी) को नर्मदा तट पर एक ऐतिहासिक दीक्षा समारोह होगा। इसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा 'शंकरदूत' के रूप में संकल्प लेंगे। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव अद्वैत वेदांत के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान देने के लिए स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती और गौतम भाई पटेल को सम्मानित करेंगे।
वैश्विक केंद्र बनता एकात्म धाम
ओंकारेश्वर अब वैश्विक स्तर पर अद्वैत दर्शन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ प्रथम चरण के तहत 108 फीट ऊँची 'स्टैचू ऑफ वननेस' स्थापित हो चुकी है। वहीं, द्वितीय चरण में 2,195 करोड़ रुपये की लागत से 'अद्वैत लोक संग्रहालय' का निर्माण तेज़ी से चल रहा है, जो आने वाले समय में शांति और एकात्मता का वैश्विक प्रतीक बनेगा।