डिजिटल हुई MP विधानसभा: अब विधायकों को ऑनलाइन मिलेंगे प्रश्नों के उत्तर, शीतकालीन सत्र होगा पेपरलेस
आगामी शीतकालीन सत्र से विधानसभा में पेपरलेस प्रणाली लागू होगी। विधायकों को प्रश्नों के उत्तर और सदन में चर्चा के लिए जरूरी संदर्भ ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 11:52:27 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 12:07:45 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- शीतकालीन सत्र से विधानसभा में पेपरलेस प्रणाली लागू होगी
- विधायकों को प्रश्नों के उत्तर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे
- प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने के लिए ओटीपी व्यवस्था भी रहेगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,भोपाल। पहले जब सदस्य को प्रश्न लिखकर जमा करने होते थे, तब विधानसभा के एक सत्र में औसत 700 प्रश्न आया करते थे। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या 4 हजार तक पहुंच गई है। ये मात्र प्रश्न नहीं बल्कि सदस्यों के क्षेत्र की आवाज है। विधानसभा के आगामी सत्र से पेपरलेस व्यवस्था लागू होगी।
सदस्यों को प्रश्नों के उत्तर भी ऑनलाइन मिलेंगे। सदन में किसी विषय विशेष की चर्चा के लिए संदर्भ भी ऑनलाइन ही मिल जाएगा। यह बात विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के अंतर्गत विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कही।
तकनीक का सही उपयोग- तोमर
विधानसभा में तोमर ने कहा कि अगर हमें आगे बढ़ाना है, तो युग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जब भी कोई नई तकनीक आती है तो एक पक्ष उसका विरोध करता है और एक पक्ष उसे अस्त्र बनाकर प्रतिस्पर्धा में अन्य लोगों के साथ विजय प्राप्त करता है। तकनीक का उपयोग करके समय बचाया जा सकता है। डिजीटल इंडिया का ही परिणाम है कि एक बटन दबाकर पैसा सीधा हितग्राही के खाते में पहुंचा दिया जाता है।
विधानसभा के पेपरलेस होने की प्रक्रिया को लेकर अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब डिजीटल भारत की बात चल रही थी तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लगता था कि लोकसभा, राज्यसभा व देश की सभी विधानसभाएं एक स्थान पर उपलब्ध होनी चाहिए। इसी मंशा के अनुरूप नेवा योजना बनाई गई।
उपयोग में सावधानी रखें- शेखावत
तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री होने के कारण मैंने क्रियान्वयन का जिम्मा संभाला था। आज मध्य प्रदेश में यह परियोजना मूर्तरूप ले रही है। इस अवसर पर लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि तकनीक का फायदा-नुकसान दोनों हैं। संभलकर उपयोग करना आवश्यक है।
सतीश सिकरवार ने इसे अच्छा बताया और अपेक्षा की कि प्रश्नों के उत्तर समय पर मिलेंगे। इसके लिए ओटीपी आएगा। इससे ही उत्तर प्राप्त होंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी सदस्यों के साथ उनके सहयोगियों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे ई-विधान का उपयोग कर सकें।