
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में मई 2016 से बंद पदोन्नति का सिलसिला एक जुलाई से प्रारंभ हुआ। इसका आधार महाधिवक्ता प्रशांत सिंह द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की वह कानूनी सलाह बनी जो 29 जून 2026 को भेजी गई थी। इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के संचालन या क्रियान्वयन पर कोई रोक नहीं है। मौखिक आश्वासन तत्समय की परिस्थिति के संदर्भ में था। तब निर्णय शीघ्र आने की संभावना थी, लेकिन फिर परिस्थितियां बदल गईं।
हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग के पूर्व सचिव डीएस राय का कहना है कि जब वचन दिया गया तो फिर उसका पालन करना था। यदि परिस्थिति बदली तो फिर न्यायालय के संज्ञान में विषय लाना था। उधर, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जो स्थिति होगी, उसके अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने 30 जून को सभी विभाग को महाधिवक्ता के पत्र और अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन के अभिमत के साथ भेजकर कार्रवाई करने के लिए कहा। अभिमत में साफ कहा गया कि जो अंडरटेकिंग दी गई, उसे न तो न्यायालय द्वारा किसी न्यायिक आदेश में दर्ज किया गया और न ही किसी ऐसे निर्देश में शामिल किया, जिसमें राज्य को वैधानिक शक्तियों के प्रयोग करने से रोका गया हो।
मध्य प्रदेश राज्य बनाम विन्नी कुमार बाबेल सहित अन्य आदेशों में यह माना गया कि नियमों को चुनौती देने का मामला लंबित होने पर राज्य सरकार को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुलाने और पदोन्नति देने से रोका नहीं जा सकता। हां, यह शर्त अवश्य रहेगी कि ऐसी पदोन्नति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इसी अभिमत के आधार पर विभाग आगे बढ़े। मंगलवार को भी डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति के आदेश जारी किए गए। अन्य विभागों में भी प्रक्रिया चल रही है।
उधर, पूर्व सचिव डीएस राय का कहना है कि अंडरटेकिंग देने का मतलब उसका पालन सुनिश्चित करना है। यदि ऐसा न हो तो फिर इसका मतलब ही क्या रह जाएगा। मान लिया जाए कि परिस्थितियां बदल गई हैं। नई बेंच बनेगी और फिर सुनवाई होगी। इसमें समय भी लगेगा तो कम से कम न्यायालय के संज्ञान में विषय लाया जाना चाहिए था क्योंकि इस मामले से लाखों कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
यह भी पढ़ें- इंदौर में अब हिंदी माध्यम में होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, प्रदेशभर का पहला कॉलेज बना SGSITS, 60 सीटों को मिली मंजूरी
वहीं, सामान्य, अन्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) के अध्यक्ष केपीएस तोमर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाकर रखने के लिए कहा, मगर पदोन्नतियां की जा रही हैं जबकि नियम को दी गई चुनौती पर अभी तक निर्णय नहीं आया है। निर्णय शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई के विपरीत आता है तो फिर जो कर्मचारियों को मानसिक क्षति होगी, उसका दायित्व किसका रहेगा।