'RGPV को टूटने से बचाओ': यूनिवर्सिटी विभाजन के खिलाफ भोपाल में भड़के कर्मचारी, जमीन घपले की CBI जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई जाएगी और विश्वविद्यालय को बचाने के लिए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 10:26:11 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 10:26:11 PM (IST)
आरजीपीवी के कर्मचारियों ने विवि के विभाजन के खिलाफ किया प्रदर्शन। सौ- आयोजकHighLights
- विवि विभाजन के विरोध में काला रिबन बांधकर धरना दिया
- फैसला स्थगित करने और कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग
- हेमराज बागवान ने कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) कर्मचारी/श्रमिक संघ ने विश्वविद्यालय के विभाजन और कर्मचारियों के नियमितीकरण/विनियमितीकरण की मांग को लेकर शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद सोमवार से कर दिया।
संघ ने 11 सितंबर 2026 को शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। सात दिन बीतने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
काला रिबन बांधकर प्रदर्शन
विश्वविद्यालय बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों ने काला रिबन बांधकर लंच के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सांकेतिक धरना दिया। कर्मचारियों ने प्रदेश की एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय आरजीपीवी को विघटन से बचाने की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया।
संघ अध्यक्ष हेमराज बागवान ने विश्वविद्यालय में हुई कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
फैसला वापस लेने की मांग
संघ के महामंत्री सुधीर कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय के विभाजन संबंधी शासन के निर्णय को तत्काल स्थगित करने और वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को बचाने के लिए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
संघ ने विश्वविद्यालय की जमीन से जुड़े मामलों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जमीन विश्वविद्यालय के अधिकारियों के परिजनों के नाम किए जाने के मामले सामने आए हैं।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। संघ का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।