सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले का खतरा: MP में सॉफ्टवेयर अपडेट शुरू
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से मिले अलर्ट के बाद मध्य प्रदेश में सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग जोखिम वाले सॉफ्टवेयर को नए वर्जन से अपडेट कर रहा है।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 02:00:17 PM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 02:20:31 PM (IST)
प्रतीकात्मक, एआई से तैयार फोटो।HighLights
- जोखिम वाले सॉफ्टवेयर को नए वर्जन से किया जा रहा अपडेट
- गोपनीय जानकारी तक पहुंचने और डेटा चोरी होने का खतरा
- अधिकारी वेबसाइट का डेटा सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। दुनियाभर में सरकारी और निजी वेबसाइटों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाले साइबर खतरे ‘पीएचपी2शेल’ के बाद मध्य प्रदेश में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से पिछले सप्ताह मिले अलर्ट के बाद प्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग उन सॉफ्टवेयर को नए वर्जन से अपडेट कर रहा है, जिनमें सुरक्षा संबंधी जोखिम बताया गया है।
सेंधमारी का जोखिम
अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश की वेबसाइटों का डेटा सुरक्षित है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट) ने पीएचपी के दो वर्जन में सेंधमारी का जोखिम बताया था।
पीएचपी2शेल में पीएचपी यानी हाईपरटेक्स्ट प्रीप्रोसेसर के कुछ वर्जन की सुरक्षा संबंधी खामियों का फायदा उठाकर साइबर हमलावर दूर बैठे ही सर्वर पर अपनी मर्जी का कोड चला सकते हैं।
इसके लिए उन्हें हर स्थिति में वेबसाइट पर लाग-इन करने की जरूरत भी नहीं होती। इससे सर्वर पर नियंत्रण हासिल करने, गोपनीय जानकारी तक पहुंचने और डेटा चोरी करने का खतरा पैदा हो सकता है।
अपडेट करना जरूरी
इस संबंध में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम सेल्वेंद्रन ने कहा कि पीएचपी के वर्जन अपडेट किए जा रहे हैं। पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही हैं। कहीं से भी डेटा में सेंधमारी की सूचना नहीं है।
वहीं साइबर एक्सपर्ट अभिषेक चौरिया कहते हैं कि सरकारी वेबसाइटों की नियमित ऑडिट जरूरी है। बीमा भी कराया जाना चाहिए।