
राज्य ब्यूरो, भोपाल नवदुनिया। मध्य प्रदेश विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान आज सिंगरौली में धरौली कोल ब्लाक परियोजना के मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि पूर्ण अधिग्रहण हुए खदान को संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दबाव में विस्थापन की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हुई और खदान संचालन की अनुमति दे दी गई। आदिवासी परिवार प्रभावित हो रहे हैं। भू अर्जन अधिनियम का पालन नहीं हुआ। प्रभावितों को पूरी राशि भी नहीं दी गई।
थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया और यातायात प्रभारी जितेंद्र सिंह कुशवाहा की पत्नी को मुआवजा दिया गया जो स्थानीय रहवासी नहीं है। हंगामें के दौरान 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थिगित की गई। कांग्रेस ने विधानसभा की संयुक्त कमेटी बनाकर जांच कराने, खनन रोकने की मांग की है। कांग्रेस के विधायक आसंदी के सामने आए और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने सरकार पर लगाया आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया।
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा पांच गांव में अधिग्रहण की कार्रवाई हुई है। 1152 विस्थापितों को 368 करोड़ रुपये का मुआवजा अवार्ड हुआ है। इसमें से 144 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जांच कराने के लिए विभागीय मंत्री ने बोल दिया है। इसमें पात्रता देख ली जाएगी। जहां अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी हो जाती हैं वहां खनन हो सकता है। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही प्रारंभ होते ही फिर हंगामा होने लगा। इस पर 12 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।
मंत्री संपतिया उइके ने बताया कि वहां पेड़ों की कटाई हुई है, खदान प्रारंभ नहीं हुई है। केवल मिट्टी निकाली जा रही है, हम आदिवासी है किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने देंगे। वही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यही तो हम कह रहे हैं की खदान का काम वहां पर प्रारंभ हो गया है। राशि ही नहीं दी है, 50 लाख रुपए के हिसाब से 6000 करोड़ रुपए का मुआवजा बांटा है, लेकिन 354 करोड़ रुपए ही जमा कराए गए हैं। इस हिसाब से 200000 रुपये से अधिक किसी को नहीं मिलेंगे।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस के सदस्य सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब हम लोग वहां गए थे तब विस्थापितों से मिलने नहीं दिया गया। 4000 पुलिस वाले तैनात कर दिए गए थे, आखिर ऐसा वहां क्या हो रहा है जो सरकार सामने नहीं आने देना चाहती है। सदस्य आसंदी के सामने आ गए।
राजस्व मंत्री ने बताया कि सिंगरौली जिले के अंतर्गत कोल ब्लॉक परियोजना के लिए 8 गांव की निजी भूमि 554 हेक्टेयर, सरकारी गैर वन भूमि 681.80, वनभूमि 1335.35 हेक्टेयर तथा राजस्व वन भूमि 62. 19 हेक्टर यानी कुल मिलाकर 2672 हेक्टेयर प्रभावित भूमि परियोजना के लिए प्रस्तावित है।
12 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही फिर धिरौली कोल ब्लॉक का मामला उठा। कांग्रेस विधानसभा की संयुक्त कमेटी बनाकर जांच करने की मांग कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह आदिवासियों के सम्मान की बात है। कांग्रेस ने इसके बाद बहिर्गमन कर दिया।