
दिलीप मंगतानी, नईदुनिया, भोपाल। संत हिरदाराम नगर एवं आसपास की ढाई लाख आबादी को अब पीने का साफ पानी भरपूर मात्रा में मिल सकेगा। लंबे समय तक जलसंकट नहीं होगा। नगर निगम यहां पर नया फिल्ट्रेशन प्लांट बना रहा है। इसके साथ ही 25 साल पुरानी पाइप लाइन बदलने का प्रस्ताव है। करीब 14 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बदली जाएगी। अमृत दो योजना के तहत पहले सीवेज एवं पेयजल लाइनें दोनों बदलने का प्रस्ताव था। अब सीवेज की जगह पेयजल लाइनें ही बदली जाएंगी।
आबादी की बढ़ती रफ्तार और भविष्य में पानी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए नगर निगम ने लॉन्ग टर्म योजना के तहत साधु वासवानी कॉलेज के निकट नया फिल्ट्रेशन प्लांट का निर्माण शुरू किया है। इसकी क्षमता चार एमएलडी है। इसे मिलाकर संत हिरदाराम नगर जोन में जल्द ही 10 एमएलडी पानी को फिल्टर करने की क्षमता हो जाएगी। इससे लंबे समय तक जलसंकट की स्थिति निर्मित नहीं होगी। 20 लाख लीटर क्षमता का ओवर हेड टैंक भी बनाया जाएगा।
नगर निगम ने करीब 25 साल पहले जल आवर्धन योजना के तहत बैरागढ़ के आवासीय इलाकों में पेयजल लाइनों का जाल बिछाया था। यह लाइनें अब दम तोड़ रही हैं। कुछ लाइनें नालियों एवं सीवेज लाइनों के पास से गुजरती हैं। जर्जर होने के कारण पेयजल सप्लाई के समय इन लाइनों में गंदा पानी मिलकर घरों तक पहुंच जाता है।
बोरबन से संत हिरदारामजी की कुटिया के पीछे से रेल पटरियों से होती हुई गांधीनगर की ओर जाने वाली पाइप लाइन भी जर्जर हो चुकी है। यह लाइन आए दिन क्षतिग्रस्त होती है, इससे गांधीनगर की जलापूर्ति प्रभावित होती है। यह लाइन भी अमृत योजना के तहत बदलने का प्रस्ताव है। बैरागढ़ कला में भी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जल कार्य विभाग फिलहाल शिकायत मिलने पर लाइनों की मरम्मत करता है। यह लाइन लंबे समय से बदलने की जरूरत महसूस की जा रही थी। काम पूरा होने से बैरागढ़ के अलावा गांधीनगर, बैरागढ़ कला एवं आसपास की करीब ढाई लाख आबादी को बड़ी राहत मिलेगी। आबादी बढ़ने पर भी नागरिकों को शुद्ध पानी मिल सकेगा।
आमतौर पर नई पेयजल लाइनों के लिए जीआई एवं एमएस पाइप का उपयोग होता है। नगर निगम पहली बार डक्टाइल आयरन पाइप बिछा रहा है। इसे डीआई पाइप भी कहा जाता है। यह पाइप उच्च प्रेशर सहन करने में सक्षम होते हैं। जंग से बचाने के लिए बाहर जिंक एवं बिटुमन कोटिंग होती है। इसके अंदर सीमेंट मोर्टार लाइनिंग होती है। इस कारण पानी गर्म नहीं होता और इसमें जंग आसानी से नहीं लगती। प्लास्टिक पाइप की तुलना में यह मजबूत होते हैं। साथ ही लो मेंटेनेंस होने के कारण लीकेज की संभावना कम होती है।
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नए जल शोधन संयंत्र का काम चल रहा है। जल्द ही पूरा हो जाएगा। नई पाइप लाइन बिछाने के लिए डीआई पाइप भी आ गए हैं। डीआई पाइप टिकाऊ और मजबूत होते हैं। अब लंबे समय तक जलसंकट नहीं होगा। लीकेज की समस्या भी खत्म हो जाएगी। बैरागढ़ और गांधीनगर की आबादी को बड़ी राहत मिलेगी। - सचिन साहू, एई जल कार्य विभाग नगर निगम