स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया 13 मार्च से शुरू, राज्य बोर्ड और सीबीएसई की आयु सीमा में छह माह का अंतर बना चिंता का कारण
मध्य प्रदेश में आरटीई प्रवेश 13 मार्च से शुरू होंगे। राज्य बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों की आयु सीमा में छह माह का अंतर सामने आया है, जिससे भविष्य में छात् ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 10 Mar 2026 08:36:01 AM (IST)Updated Date: Tue, 10 Mar 2026 09:23:16 AM (IST)
स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू। (फाइल फोटो)HighLights
- आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया 13 मार्च से शुरू होगी।
- मप्र बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों की आयु सीमा में छह माह का अंतर।
- आयु अंतर से भविष्य में छात्रों को प्रवेश और कक्षा परिवर्तन में समस्या संभव।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपार। मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया 13 मार्च से शुरू होने जा रही है। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राज्य बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों में निर्धारित आयु सीमा को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है।
दोनों बोर्डों की प्रवेश आयु सीमा में करीब छह माह का अंतर है, जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शिक्षाविदों का कहना है कि डिजिटल रिकार्ड प्रणाली के दौर में यह अंतर आगे चलकर छात्रों के लिए प्रवेश, कक्षा परिवर्तन और अन्य शैक्षणिक योजनाओं में बाधा बन सकता है।
राज्य बोर्ड और सीबीएसई में अलग-अलग आयु सीमा
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मप्र बोर्ड से संचालित स्कूलों में नर्सरी में प्रवेश के लिए बच्चों की न्यूनतम आयु तीन वर्ष और अधिकतम साढ़े चार वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष और अधिकतम साढ़े सात वर्ष तय की गई है।
दूसरी ओर सीबीएसई स्कूलों में नर्सरी के लिए तीन से चार वर्ष और पहली कक्षा के लिए छह से सात वर्ष तक की आयु सीमा निर्धारित है। इस प्रकार दोनों बोर्डों के बीच लगभग छह माह का अंतर बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर आगे चलकर बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
डिजिटल रिकार्ड के कारण बढ़ सकती है समस्या
शिक्षाविदों का कहना है कि वर्तमान समय में छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकार्ड डिजिटल रूप में दर्ज होता है। ऐसे में यदि आयु सीमा में अंतर रहेगा तो कई बार छात्र निर्धारित मानकों से अधिक या कम आयु के हो सकते हैं।
इस स्थिति में उन्हें विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं, छात्रवृत्ति या अन्य प्रवेश प्रक्रियाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दोनों बोर्डों के बीच आयु सीमा को लेकर एक समान नीति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।