नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। डीबी मॉल के सामने स्ट्रीट लाइट के खंभे में दौड़ रहे करंट ने 29 वर्षीय युवा अधिवक्ता और भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की जान ले ली। लेकिन हादसे के 24 घंटे बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि खंभे में करंट कैसे पहुंचा और जिम्मेदार कौन है।
नगर निगम और बिजली कंपनी के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बजाय बयानबाजी जारी रही।
सोमवार देर शाम निगम ने संबंधित पोल को अपना बताया, जबकि बिजली कंपनी ने हादसे में अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर पांच दिन में रिपोर्ट मांगी है।
डीबी मॉल के सामने हुआ हादसा
बता दें कि रविवार रात करीब आठ बजे दिव्यऋषि अपनी महिला मित्र के साथ डीबी सिटी जा रहे थे। मेट्रो स्टेशन के सामने वाहन पार्क करने के बाद दोनों डिवाइडर पार कर रहे थे। इसी दौरान दिव्यऋषि ने स्ट्रीट लाइट के पोल को छुआ और तेज करंट का झटका लगते ही दूर जा गिरे। उनका हाथ पकड़े महिला मित्र को भी करंट का झटका लगा।
मौके पर मौजूद ट्रैफिक हवलदार ने सीपीआर दिया और अस्पताल पहुंचाने में मदद की, लेकिन एम्स में डाक्टरों ने दिव्यऋषि को मृत घोषित कर दिया। एमपी नगर पुलिस की शार्ट पीएम रिपोर्ट में भी मौत की वजह करंट लगना बताई गई है। पुलिस अब स्वजन के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी।
पोल निगम का, रखरखाव किसका? सवाल अब भी कायम
हादसे वाला पोल मेट्रो प्रोजेक्ट के दौरान लगाया गया था और उसका रखरखाव नगर निगम करता है। पोल के आसपास खुले तार होने की बात भी सामने आई है। बिजली कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया है, जबकि निगम का कहना है कि जांच में अभी किसी की लापरवाही सामने नहीं आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पोल निगम का है और उसके पास खुले तार हैं तो उसमें करंट पहुंचने की जिम्मेदारी किसकी है?
शहर में जगह-जगह ‘खुले तारों का जाल’
डीबी माल की घटना के बाद शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, वीआइपी रोड, नर्मदापुरम रोड समेत कई स्थानों पर पोल के आसपास खुले केबल और बाहर निकलते तार दिखाई देते हैं। इन रास्तों से रोज हजारों लोग गुजरते हैं।
हादसे के बाद भी यदि खुले तारों और पोल की तत्काल जांच नहीं होती है तो यह व्यवस्था की गंभीर चूक मानी जाएगी।
अभिभाषक संघ ने की मांग, दर्ज किया जाए हत्या का प्रकरण
जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में वकीलों ने एमपी नगर थाने पहुंचकर आवेदन दिया। इसमें संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने, जिम्मेदारों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
आवेदन में खुले तार और करंट प्रवाहित होने को विभागीय लापरवाही का परिणाम बताया गया है। इन आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर होना बाकी है।
सीएम के निर्देश के बाद जांच कमेटी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर संवेदना जताते हुए जिला प्रशासन को जांच और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने चार सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें अपर कलेक्टर सुमित पांडे, सीएमएचओ मनीष शर्मा, विद्युत सुरक्षा के कार्यपालन यंत्री मोहम्मद जावेद और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता प्रदीप सिंह चौहान शामिल हैं। समिति को पांच दिन में प्रतिवेदन देना है।
हादसे के बाद पांच बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं-
- स्ट्रीट लाइट के पोल में करंट कैसे पहुंचा?
- खुले तार और केबल की स्थिति के लिए जिम्मेदार एजेंसी कौन?
- पोल का निर्माण, विद्युत कनेक्शन और रखरखाव किसके जिम्मे था?
- हादसे से पहले पोल की सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई?
- शहर के अन्य स्ट्रीट लाइट पोल की जांच कब होगी?
जिस पोल से हादसा हुआ है, वह नगर निगम व स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आता है। इसका रखरखाव बिजली कंपनी के पास नहीं है। - प्रदीप सिंह चौहान, जीएम, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, भोपाल
नगर निगम की टीम ने पीडब्ल्यूडी, विद्युत विभाग और पुलिस की टीम के साथ मौके पर निरीक्षण किया था। फिलहाल तो वहां कोई लापरवाही नजर आई है। हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि खंबे में करंट कैसे आया।- अक्षय तेम्रवाल, अपर आयुक्त, नगर निगम
मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल फुल पीएम रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है।- विकास शहवाल, डीसीपी जोन-2