
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर के मुगालिया छाप स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने का दावा सामने आने के बाद 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी और पेट दर्द की शिकायत पर 11 विद्यार्थियों को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में रसोई की बदहाल स्थिति और जरूरी दस्तावेजों की अनुपलब्धता जैसी कई कमियां सामने आई हैं। विभाग ने नौ खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए लिए हैं।
जानकारी के अनुसार मुगालिया छाप-नीलबड़ स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बालक छात्रावास में शनिवार रात भोजन वितरण के दौरान एक थाली में आलू की सब्जी के साथ मरी हुई छिपकली दिखाई देने की बात सामने आई।
विद्यार्थियों ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद भोजन वितरण रोक दिया गया। इसी बीच करीब 13 विद्यार्थियों को उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई। उन्हें रात करीब 10:30 बजे जेपी अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद दोबारा से भोजन तैयार कराया गया, जिसे रात 11 बजे के बाद परोसा गया।
इसकी सूचना खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम को मिली तो अधिकारियों ने रविवार को विद्यालय पहुंचकर रसोई और भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया। विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं। हालांकि, भोजन में छिपकली मिलने और विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में रसोई की फर्श और दीवारों पर कई जगह टाइल्स व पत्थर टूटे मिले। आटा गूंथने की मशीन के आसपास भी सतह क्षतिग्रस्त थी। भोजन परोसने के स्थान पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी। पेस्ट कंट्रोल के रिकार्ड और भोजन बनाने वाले कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं मिले।
ये कमियां इसलिए गंभीर हैं, क्योंकि आवासीय विद्यालय में सैकड़ों बच्चों के लिए रोजाना भोजन तैयार होता है। रसोई की साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और भोजन की निगरानी में चूक होने पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हो सकते हैं।
विभाग ने बेसन, कोकोनट पाउडर, पापड़, कतरन, तैयार दाल, मटर पनीर, तेल, बर्फी और मसूर दाल के नमूने जांच के लिए लिए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान विद्यालय प्राचार्य रत्ना दुबे, स्टाफ और कैटरिंग स्टाफ की ओर से राहुल त्रिवेदी मौजूद थे।
विद्यालय के छात्रावास में छठवीं से 12वीं कक्षा तक के 1120 विद्यार्थी रहते हैं। इनमें 560 छात्र और 560 छात्राएं हैं। भोजन गर्ल्स छात्रावास की मेस में तैयार होता है और उसका एक हिस्सा बालक छात्रावास में भेजा जाता है। रात आठ बजे भोजन वितरण शुरू होता है।
बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी आवासीय व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता जांचने, रसोई की स्वच्छता बनाए रखने और कीटों की रोकथाम की नियमित निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
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अस्पताल में 11 बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें पांच बच्चे 14 वर्ष के हैं। सभी बच्चों की हालत ठीक है।- डॉ. संजय कुमार जैन, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल
बच्चों की तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सूचना मिली थी। मामले की जांच की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।- रासबिहारी शर्मा, थाना प्रभारी, रातीबड़
निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी कई कमियां प्रथम दृष्टया सामने आई हैं। नौ नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।- शिवराज पावक, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी