
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर दायरे में बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्त निगरानी में है। गुरुवार को एनजीटी में इस मामले की सुनवाई होगी, जिसमें नगर निगम और जिला प्रशासन अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) पेश करेंगे।
हालांकि प्रशासन की कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है। करीब साढ़े चार महीने पहले सीमांकन पूरा होने के बावजूद 347 चिह्नित अवैध निर्माणों में से अब तक केवल 57 ही हटाए जा सके हैं, जबकि 290 निर्माण अब भी जस के तस खड़े हैं।
जानकारी के अनुसार एफटीएल क्षेत्र में निजी निर्माणों को हटाने के लिए जिला प्रशासन ने 21 अप्रैल को आदेश जारी किए थे, लेकिन अमल 74 दिन बाद शुरू हो सका।बीते शनिवार को टीटी नगर एसडीएम अर्चना रावत शर्मा, नगर निगम, वन विभाग और टीएंडसीपी की संयुक्त टीम ने गौरा, सेवनिया गौंड और बिशनखेड़ी में छह निजी निर्माण तथा शासकीय भूमि पर एक अवैध निर्माण हटाए थे। इनमें निर्माणाधीन मकान, बाउंड्रीवाल, टीनशेड और पक्के पिलर शामिल थे। वहीं हलालपुर स्थित वायु रेस्टोरेंट के संचालक ने अपना स्ट्रक्चर स्वयं हटाना शुरू कर दिया।
प्रशासन की अगली कार्रवाई बोट क्लब क्षेत्र में प्रस्तावित है। यहां एफटीएल सीमा में आने वाले 26 निर्माणों का सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें जाक रेस्टोरेंट का लगभग चार हजार वर्गफीट हिस्सा, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेव परिसर तथा नगर निगम के फूड जोन की 26 दुकानों को एफटीएल क्षेत्र में चिह्नित किया गया है। हलाांकि इन पर अब तक कार्रवाई नहीं की जा सकी है, अब इनके बिना ही रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जाएगी।
मामले का सबसे बड़ा विवाद पर्यावरण विभाग के उस आदेश को लेकर है, जिसमें मार्च-2022 के बाद हुए निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जबकि एनजीटी ने अपने आदेश में पूरे कैचमेंट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने को कहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि 2022 से पहले बने बड़े और रसूखदार निर्माणों पर कार्रवाई कब होगी। पर्यावरणविद राशिद नूर खान का कहना है कि इससे कार्रवाई का दायरा सीमित हो गया है।
बड़ा तालाब के एफटीएल से 50 मीटर दायरे में चिह्नित अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।जिन अवैध निर्माणों को लेकर स्टे मिला हुआ है उन पर कार्रवाई नहीं की गई है।इसको लेकर रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे एनजीटी में पेश किया जाएगा। संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम।